भारत की महत्वाकांक्षी परियोजनाएं

        भारत की महत्वाकांक्षी परियोजनाएं

सरकारें देश के विकास के लिए अनेक भारत की महत्वाकांक्षी परियोजनाएं चलाती हैं। इन परियोजनाओं के उद्देश्य अलग-अलग होते हैं । कोई परियोजना सिंचाई, बिजली आदि मूलभूत सुविधाओं पर केन्द्रित होती है तो कई परियोजनाओं की रूपरेखा व्यापार , राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे बड़े विषयों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। कई बार इनमें से कुछ परियोजनाएं अपने महत्त्वाकांक्षी उद्देश्यो और अद्वितीय संरचनाओं के कारण काफ़ी चर्चित हो जाती है। हमारे देश में भी कुछ ऐसी परियोजनाएं  है जो अपने महत्त्वाकांक्षी उद्देश्यो और विस्तार के लिए प्रसिद्ध है। इन परियोजनाओं में से कुछ का संक्षिप्त विवरण नीचे प्रस्तुत है –

गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी)

यह परियोजना गुजरात सरकार और गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक सिटी कंपनी लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है।इसका विचार वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2007 में सामने आया।इसे ‘व्यावसायिक शहर’ के तौर पर प्रचारित किया गया है तथा अंर्तराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र के रूप में विकसित करने की योजना से स्थापित किया गया है। यह गांधीनगर जिले में ‘अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट’ से 12 किमी दूर साबरमती नदी के किनारे स्थित है। यह देश की पहली क्रियाशील स्मार्ट सिटी है। यह 3.99 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली है। वर्तमान योजना के तहत इसका 67% हिस्सा व्यावसायिक, 22% आवासिक और 11% सामाजिक सुविधाओं के लिए इस्तेमाल होगा।इसकी विश्व स्तरीय सुविधाएं इस परियोजना का मुख्य आकर्षण है। इसमें पाइप लाइन द्वारा घर-घर गैस पहुंचाना, एयर कंडीशनिंग के लिए सिटी लेवल ‘डिस्ट्रिक कूलिंग सिस्टम’, आटोमेटिक सालिड वेस्ट मैनेजमेंट और 24 घंटे निर्बाध बिजली की आपूर्ति प्रमुख हैं।‌ इस परियोजना में अभी तक 10500 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई है।अभी तक 225 कंपनियां क्रियान्वित हो चुकी हैं और 12000 पेशेवर रोजगार कर रहे हैं।

भारतमाला परियोजना- भारत की महत्वाकांक्षी परियोजनाएं

यह भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित और क्रियान्वित एक महात्वाकांक्षी परियोजना है। हमारे देश का ‘रोड नेटवर्क’ 54,82000 किमी का है जो कि विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रोड नेटवर्क है। इनमें से केवल 2% राष्ट्रीय राजमार्गमार्ग  हैं । इस परियोजना के पहले चरण में देश के 80%जिलों को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके तहत पश्चिम से पूर्वी भू सीमा गुजरात से मिजोरम को रोड नेटवर्क द्वारा जोड़ना है। इसमें तटवर्ती क्षेत्र महाराष्ट्र से पश्चिम बंगाल को भी रोड नेटवर्क से जोड़ना शामिल है। पहाड़ी क्षेत्रों को भी राष्ट्रीय महामार्गों द्वारा जोड़ना इस परियोजना का महत्त्वपूर्ण लक्ष्य है । इस प्रकार यह परियोजना सम्पूर्ण रूप से देश की माला बनाती प्रदर्शित होती है। इस‌के पहले चरण में 83,677 किमी रोड बनाने का लक्ष्य रखा गया है जिसकी अनुमानित लागत 5.35 लाख करोड़ है।

जोजिला टनेल(सुरंग)

यह सुरंग लद्दाख के कारगिल जिले के सोनमर्ग और द्रास शहर को जोड़ती है। यह हिमालय पर ‘जोजिला पास’ के पास स्थित है। सर्दियों में ‘जोजिला पास’ के क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण श्रीनगर- कारगिल – लेह हाईवे साल के लगभग छह महीने बंद रहता है । इस टनल के बनने से श्रीनगर और कारगिल के बीच   सड़क व्यवस्था वर्षभर चालू रहेगी। इसकी लंबाई 14.2 किमी है। यह एशिया की सबसे लंबी द्विदिशात्मक सुरंग है। इस टनल में अत्याधुनिक सुविधाएं जैसे- नवीनतम सुरक्षा उपकरण, सीसीटीवी कैमरों द्वारा निरीक्षण, वेंटिलेशन सिस्टम आदि की व्यवस्था की जाएगी।इस परियोजना को भारत सरकार ने 2018 में स्वीकृति प्रदान की थी।

चिनाब रेलवे पुल

यह पुल जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के कौड़ी और बक्कल नामक क्षेत्रों के बीच बनाया जा रहा है। चिनाब नदी पर बन रहा यह रेलवे पुल विश्व का सबसे ऊंचा पुल होगा, जिसकी ऊंचाई नदी की सतह से 359 मी होगी। इस पुल का आकार चाप के जैसा होगा। इसे बनाने के लिए इस्पात और कंक्रीट का उपयोग किया जा रहा है। इस पुल की भारक्षमता 500 टन है तथा निर्माता कंपनी ने पुल की मजबूती को लेकर 120 साल की वारंटी दी है। यह 260 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं को झेल सकेगा। इसकी लंबाई 1315 मी है।

सेतु भारतम

इस परियोजना का उद्देश्य राजमार्गों को रेलवे क्रासिंग से मुक्त करना है। इस परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 4 मार्च 2016 को किया गया था। इसका बजट 102 अरब रुपए का है। इस परियोजना के अंतर्गत ऐसी क्रासिंग जहां कर्मी तैनात नही हैं उन पर नये पुल बनाना और ब्रिटिश युग के लगभग 1500 पुराने पुलों को चौड़ा करना और उनका नवीनीकरण शामिल है। इससे रेलवे क्रासिंगों पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।

चारधाम महामार्ग- भारत की महत्वाकांक्षी परियोजनाएं

इस परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 दिसंबर 2016 को देहरादून में किया था। यह महामार्ग उत्तराखंड राज्य में चार तीर्थ स्थलों बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री को आपस में जोड़ेगा। इस परियोजना का बजट 1200 करोड़ रुपए का है।‌ इस परियोजना में प्रायोजित महामार्ग की लंम्बाई 719 किमी है। चारधाम महामार्ग ऋषीकेश से निकलकर पश्चिम से पूर्व और दक्षिण से उत्तर चार अलग-अलग मार्गों ऋषीकेश-यमुनो‌त्री, ऋषीकेश-गंगोत्री, ऋषीकेश-केदारनाथ और ऋषीकेश-बद्रीनाथ  में बंट जाएंगे। यह परियोजना अपर्याप्त विकसित चारधाम रेलवे को पूर्ण करेगी और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच को आसान बनाएगी।

मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक

इस परियोजना को शिवडी-न्हावासेवा ट्रांस हार्बर लिंक के नाम से भी जाना जाता है। इस परियोजना का उद्देश्य मुम्बई को नवी मुंबई से जोड़ना है। पूरा होने के बाद यह भारत का समुद्र पर बनाया गया सबसे लंबा पुल होगा।  कुल 2200 पिलर्स की मदद से इस पुल को आकार दिया जाएगा।यह 6 लेन का और 27 मी चौड़ा हाइवे है जिसमें 2 लेन आपातकालीन निकास के लिए और क्रैश बैरियर भी होगें । इसके निर्माण में इस्पात और कंक्रीट का उपयोग किया जा रहा है और इसकी कुल लंबाई 21.8 किमी है। इस परियोजना की लागत 14,262 करोड़ है। इसके निर्माण की शुरुआत अप्रैल,2018 में हुई थी और 2023 तक इसके पूरा होने की संभावना है। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण का यह अनुमान है कि पुल का कार्य पूरा होने पर  करीब 70,000 वाहन रोजाना इसका उपयोग कर सकेंगे ।

दिल्ली-मुम्बई औद्योगिक कारिडोर

यह भारत सरकार की औद्योगिक विकास की द्रष्टि से बहुत विशाल परियोजना है। यह परियोजना भारत सरकार और जापान के बीच  हुए समझौते के तहत शुरू हुई। 90 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश के साथ यह विश्व की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है। इस परियोजना में छह राज्य और एक केन्द्र शासित प्रदेश दिल्ली शामिल है। इसके अंतर्गत 24 औद्योगिक क्षेत्र, 8 स्मार्ट सिटी, 2 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, पांच ऊर्जा परियोजनाओं  की स्थापना की जाएगी। यह परियोजना निवेश को आकर्षित करने और बेरोजगारी को कम करने की द्रष्टि से एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है।

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