शिव परिवार – Shiv Parivar

आज हम आपके लिए शिव परिवार नामक लेख लेकर आये है। जिसमें भगवान शिव के परिवार के सभी सदस्यों का परिचय एवं उनके माध्यम से हमें क्या शिक्षा मिलती है ? इसका विश्लेषण किया गया है। अगर हम शिव परिवार- Shiv Parivar के आदर्श एवं मूल्यों का अनुसरण करें तो हमारा परिवार एक आदर्श एवं सुखी परिवार बन सकता है।

शिव परिवार

भगवान शिव को पारिवारिक देवता माना जाता है। भारत में विशेषकर उत्तर भारत में भगवान शिव के मंदिर प्रचुरता में प्राप्त होते हैं। इन मंदिरों में शिव परिवार की स्थापना होती है।

शिव परिवार सामाजिक पारिवारिक परम्परा का आधार है। यह परिवार भारतीय गृहस्थ परंपरा के लिए आदर्श है। जोकि सामंजस्य एवं सहअस्तित्व के सिद्धांत को परिभाषित करता है।

शिव परिवार की पूजा करने एवं उसमें निहित जीवन मूल्यों का पालन करने से मनुष्य का गृहस्थ जीवन सुखमय होता है। आज हम शिव परिवार एवं उसके सदस्यों का परिचय प्राप्त करेंगे। साथ ही उसमें निहित जीवन मूल्यों एवं आदर्श का विश्लेषण करने का प्रयत्न भी करेंगे।

शिव परिवार
शिव परिवार

शिव परिवार में स्वयं भगवान शंकर, माता पार्वती, गणेश, एवं कार्तिकेय हैं। भगवान शिव के परमप्रिय गण नंदी इस परिवार का प्रमुख अंग हैं। इसके अतिरिक्त भगवान शिव के आभूषण स्वरूप सर्प, बिच्छू, मस्तक पर स्थित चन्द्रमा आदि भी इस परिवार का ही अंग हैं। आइए शिव परिवार के प्रत्येक सदस्य का परिचय प्राप्त करते हैं।

भगवान शिव

देवाधिदेव महादेव इस परिवार के मुखिया हैं। जो सर्वज्ञ, सर्वसमर्थ, ज्ञान एवं विज्ञान के आदिस्रोत हैं। अगर आप धार्मिक वांग्मय का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि अधिकांश गूढ़ विद्याएं, स्तोत्र, मंत्र आदि भगवान शिव द्वारा ही प्रतिपादित, कीलित अथवा प्रदत्त हैं।

इतने समर्थ होते हुए भी उनकी जीवन शैली एकदम साधारण एवं आडंबरहीन है। जो न्यूनतम सुविधाओं में प्रसन्नतम जीवन जीने का संदेश प्रदान करती है।

वे शीघ्र प्रसन्न होने वाले एवं शीघ्र ही रुष्ट हो जाने वाले माने जाते हैं। इसका आशय यह है कि परिवार के मुखिया को परिवार के लोगों द्वारा किये जाने वाले छोटे कार्यों पर भी प्रसन्न होकर उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए। साथ ही गलत कार्यों पर रुष्ट होकर अनुशासन भी बनाये रखना चाहिए।

भगवान शिव प्रायः समाधि में रहते हैं। अर्थात वे घर में उपस्थित होकर भी अनुपस्थित रहते हैं। जोकि मुखिया का आवश्यक गुण है। परिवार के मुखिया को घर के सदस्यों को पर्याप्त स्वतंत्रता प्रदान करनी चाहिए। जिससे उनमें स्वयं निर्णय लेने, छोटी छोटी कठिनाइयों का सामना करने के कौशल का विकास हो सके।

इसके अतिरिक्त उनके मस्तक पर शीतल चंद्रमा विराजमान है। जो संदेश देता है कि परिवार के मुखिया को सदैव ठंडे दिमाग से सारे निर्णय लेने चाहिए। उनके शरीर पर उपस्थित सर्प, बिच्छू आदि को देखकर भय उत्पन्न होता है।

जो यह संदेश देता है कि मुखिया को कठोर दिखना चाहिए। जिससे पारिवारिक अनुशासन एवं मर्यादा बनी रहे। इस प्रकार भगवान शंकर शिव परिवार के मुखिया के रूप में एक आदर्श मुखिया के चारित्रिक गुणों को अक्षरशः परिभाषित करते हैं।

माता पार्वती

माता पार्वती एक आदर्श पत्नी एवं माँ के चरित्र का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। एक पत्नी के रूप में उनका समर्पण अद्वितीय है। कठिन परिस्थितियों में भौतिक सुविधाहीन जीवन निर्वाह करते हुए भी वे कभी शिकायत नहीं करतीं।

यद्यपि वे स्वयं आदिशक्ति हैं, सर्वसमर्थ हैं। तथापि वे एक साधारण स्त्री की भांति पति एवं परिवार का दायित्व निर्वाह करती हैं। एक आदर्श गृहिणी के रूप में उन्होंने घर-परिवार के संचालन का पूरा जिम्मा ले रखा है।

जिसके कारण भगवान शिव अनुसंधान एवं लोक कल्याण हेतु पूर्ण समय प्रदान कर पाते हैं। एक माता के रूप में उन्होंने अपने पुत्रों को उच्चतम जीवन एवं नैतिक मूल्यों की शिक्षा प्रदान की है।

एक माँ की विराट शक्ति का उदाहरण देखना हो तो माता पार्वती के चरित्र में स्पष्ट देखा जा सकता है। जो पुत्र गणेश की रक्षा हेतु महाकाली का रूप धारण कर लेती हैं। जिनके पुत्रवध से उत्पन्न विध्वंसक क्रोध का सामना करने का सामर्थ्य त्रैलोक्य में किसी के पास नहीं था।

जिनके क्रोध की शांति हेतु स्वयं महाकाल भगवान शंकर को पददलित होना पड़ा। प्रत्येक अविवाहित कन्या को माता गौरी की पूजा करने की सलाह इसलिए दी जाती है कि विवाहोपरांत वह भी माता गौरी की ही भांति आदर्श पत्नी एवं माँ बन सके।

कुमार कार्तिकेय

शिव एवं पार्वती के पुत्र कुमार कार्तिकेय शिव परिवार के ज्येष्ठ पुत्र हैं। प्रत्येक माता पिता यह चाहते हैं कि उनका पुत्र सामर्थ्यवान एवं उच्चपदस्थ हो। कुमार कार्तिकेय देवसेनापति हैं। जो उनकी वीरता एवं सामर्थ्य का द्योतक है। उन्होंने माता पिता से अलग रहकर स्वयं अपनी क्षमता एवं परिश्रम से महनीय पद एवं प्रतिष्ठा प्राप्त की है।

यह वर्तमान समय के युवाओं को संदेश देता है कि माता पिता के सामर्थ्य के बल पर नहीं अपना लक्ष्य स्वयं के परिश्रम एवं क्षमता से प्राप्त करना चाहिए।

गणेश

भगवान गणेश को विद्या- बुद्धि का देवता माना जाता है। सभी शुभ कार्यों में उनकी प्रथम पूजा होती है। वे विघ्नहर्ता हैं। वे आदर्श पुत्र हैं। उनका चरित्र सिखाता है कि एक पुत्र के लिए ब्रम्हांड में माता-पिता की सेवा से बढ़कर कुछ नहीं हैं।

माता पिता की सेवा और उनके आशीर्वाद से कुछ भी अलभ्य नहीं है। इसके अलावा उनका जीवन आजकल के उन युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत एवं उदाहरण है। जो छोटी छोटी कमियों से घबराकर जीवन संघर्ष के पथ से विचलित हो जाते हैं।

जो किसी भी प्रकार की हीनता से खिन्न होकर लक्ष्य का त्याग कर देते हैं। उन्हें भगवान गणेश के जीवन का अवलोकन करना चाहिए। जिनके शरीर पर हाथी का मस्तक लगा है। इससे बड़ी शारीरिक हीनता क्या होगी ? जिसे संसार के लिए मजाक का पात्र होना चाहिए। वह अपनी योग्यता के बल पर संसार के लिए प्रथमपूज्य है।

जो स्वयं शुभकार्यों में कुरूपता के कारण विघ्नकारक माना जाना चाहिए। उन्हें विघ्नहर्ता माना जाता है। इसलिए उनका जीवन प्रेरणा देता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति एवं परिश्रम के सामने कोई बाधा नहीं टिक सकती।

नंदी

नंदी भगवान शिव के परमभक्त एवं परमप्रिय गण हैं। वे भगवान शिव के वाहन हैं। पशुयोनि में होकर भी वे शिव परिवार का अंग हैं। यह भी शिव परिवार की विशेषता है कि उसमें सेवक को भी उचित आदर सम्मान प्रदान किया जाता है।

हमे भी इस आदर्श को ग्रहण करना चाहिए। इसके अलावा शिवजी के गले में सर्प रहते हैं। कार्तिकेय का वाहन मोर है और गणेश का वाहन चूहा है। जोकि एक दूसरे के जन्मजात शत्रु हैं। तथापि शिव परिवार में सभी सहअस्तित्व एवं सामंजस्य की भावना के साथ रहते हैं।

यह हमें सिखाता है कि एक परिवार के सदस्यों को आपसी सामंजस्य के साथ रहना चाहिये एवं दूसरे सदस्यों को भी विकसित एवं उन्नत होने का पूर्ण अवसर प्रदान करना चाहिए।

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