संज्ञा के भेद- sangya ke kitne bhed hote hain

sangya ke kitne bhed hote hain

आज हम आपके लिए संज्ञा के भेद- sangya ke kitne bhed hote hain नामक पोस्ट लेकर आए हैं। इसको पढ़ने के बाद संज्ञा के भेद और संज्ञा के संबंध में आपके सारे प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे। प्रस्तुत लेख में संज्ञा की परिभाषा, भेद और उदाहरण को सरलतम तरीके से समझाया गया है।

sangya kise kahate hain- संज्ञा का अर्थ

संज्ञा का अर्थ होता है नाम। इस संसार में जितने भी व्यक्ति या वस्तुएं हैं, उनका कोई न कोई नाम जरूर होता है। सरल भाषा में इसी नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे-

1- शीला गीत गाती है। 2- मनोज किताब पढ़ता है।

3- कानपुर अच्छा शहर है। 4- सोना महंगी धातु है।

उपर्युक्त वाक्यों में व्यक्ति, स्थान और वस्तु के नाम के बारे में कुछ कहा गया है। चारों वाक्यों में जो नाम प्रयोग हुए हैं। वही संज्ञा कहलाते हैं।

संज्ञा की परिभाषा

वह शब्द जिससे किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान के नाम का पता चलता हो, संज्ञा कहलाता है। जैसे- राम लखनऊ, पुस्तक आदि।

Noun is the name of a person, place or thing. As- Ram, Kanpur, Book.

संज्ञा के भेद- sangya ke kitne bhed hote hain

हिंदी व्याकरण में संज्ञा के तीन ही भेद होते हैं-
1- व्यक्तिवाचक संज्ञा 2- जातिवाचक संज्ञा 3- भाववाचक संज्ञा

sangya ke kitne bhed hote hain
sangya ke kitne bhed hote hain

समूहवाचक संज्ञा और द्रव्यवाचक संज्ञा को हिंदी में जातिवाचक संज्ञा के अंतर्गत ही माना जाता है।

परन्तु अंग्रेजी आदि अन्य भाषाओं से तादात्म्य स्थापित करने के उद्देश्य से आधुनिक वैयाकरण हिंदी में भी संज्ञा के पांच भेद मानने लगे हैं। इसलिए हम भी यहां संज्ञा के पांच भेद ही मानकर चलते हैं-

1- व्यक्तिवाचक संज्ञा 2- जातिवाचक संज्ञा 3- समूहवाचक संज्ञा 4- द्रव्यवाचक संज्ञा 5- भाववाचक संज्ञा।

हिंदी व्याकरण के अंतर्गत सभी प्रकार की संज्ञाओं को दो भागों में विभाजित किया गया है। एक वस्तु की दृष्टि से और दूसरा धर्म की दृष्टि से।

वस्तु की दृष्टि से – व्यक्तिवाचक संज्ञा, जातिवाचक संज्ञा, समूहवाचक संज्ञा, द्रव्यवाचक संज्ञा।

धर्म की दृष्टि से– भाववाचक संज्ञा।

संज्ञा के भेद- संज्ञा के कितने प्रकार होते हैं

संज्ञा के निम्नांकित पांच भेद होते हैं-

1- व्यक्तिवाचक संज्ञा

जिस शब्द से किसी एक व्यक्ति या वस्तु का ज्ञान होता है, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। उदाहरण-

प्रयाग, संध्या, अंकित, काशी, द्वारिका हिमालय, गंगा आदि।

2- जातिवाचक संज्ञा

वे शब्द जिनसे किसी व्यक्ति या वस्तु की पूरी जाति का बोध होता है। उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। उदाहरण-

मनुष्य, पर्वत, नदी, लड़की आदि।

3- समूहवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी एक व्यक्ति अथवा वस्तु के बारे में न बताकर पूरे समूह के बारे में बताते हैं। उन्हें समूहवाचक संज्ञा कहते हैं। उदाहरण-

सभा, टीम, आयोग, परिवार, पुलिस, अधिकारी आदि।

4- द्रव्यवाचक संज्ञा

जिस संज्ञा शब्द से उस पदार्थ का बोध हो, जिससे कोई वस्तु बनी हो। सरल शब्दों में हम यह भी कह सकते हैं कि जिस शब्द से नाप तौल वाली वस्तु का बोध हो, उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है। उदाहरण-

सोना, चांदी, ऊन, तेल, घी, धुँआ आदि।

5- भाववाचक संज्ञा

जिस शब्द से किसी वस्तु अथवा व्यक्ति के गुण, दशा, भाव, व्यापार, धर्म, अवस्था या स्वभाव का ज्ञान होता है, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं। उदाहरण-

दया, सच्चाई, क्रोध, दरिद्रता, चढ़ाई आदि।

भाववाचक संज्ञा बनाने के तरीके

भाववाचक संज्ञाओं को बनाने के लिए व्यक्ति वाचक संज्ञा, जातिवाचक संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया एवं अव्यय में ई, त्व, ता, पन, हट, वट, पा, क, व, स, न्त आदि प्रत्यय जोड़े जाते हैं। कुछ भाववाचक संज्ञाओं के उदाहरण निम्न हैं–

व्यक्तिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा बनाना

संज्ञा भाववाचक संज्ञा
शिव शिवत्व
गांधी गांधीवाद
हिटलर हिटलरशाही

जातिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा बनाना

लड़का लड़कपन
मित्र मित्रता
मानव मानवता
पुरुष पुरुषत्व
नारी नारीत्व
गुरु गुरुत्व

विशेषण से भाववाचक संज्ञा बनाना

सुंदर सुंदरता, सौंदर्य
वीर वीरता
धैर्य धीरता,
भोला भोलापन
भला भलाई
मीठा मिठास

क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाना

सजाना सजावट
बहना बहाव
लिखना लिखावट
चढ़ना चढ़ाई

अव्यय से भाववाचक संज्ञा बनाना

सम समता
दूर दूरी
समीप सामीप्य
निकट निकटता
नीचे नीचाई

सर्वनाम से भाववाचक संज्ञा बनाना

अपना अपनत्व
मम ममत्व
निज निजत्व

भाववाचक संज्ञाओं का प्रायः बहुवचन नहीं होता है। जब भाववचक संज्ञाओं का प्रयोग बहुवचन के रूप में किया जाता है। तब वे जातिवाचक संज्ञाओं की तरह प्रयुक्त होती हैं। जैसे-

विशेषता – विशेषताएँ

यहां विशेषता भाववाचक संज्ञा है। जब इसका प्रयोग बहुवचन के रूप में किया जाता है। तब यह एक जातिवाचक संज्ञा (विशेषताएँ) हो जाती है।

संज्ञाओं का विशेष प्रयोग

व्यक्तिवाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में

कभी कभी व्यक्तिवाचक संज्ञा का प्रयोग जातिवाचक संज्ञा के रूप में होता है। जैसे-

आज के समय में जयचंदों की कमी नहीं है।

इस वाक्य में जयचंद एक व्यक्तिवाचक संज्ञा है। जिसका प्रयोग किसी एक व्यक्ति के बजाय गद्दारों की पूरी जाति के लिए किया जाता है।

वे सारे लोग हरिश्चन्द्र हैं।

इस वाक्य में भी हरिश्चंद्र (व्यक्तिवाचक संज्ञा) का प्रयोग नाम के रूप में न होकर ईमानदार लोगों की पूरी जाति के लिए (जातिवाचक संज्ञा के रूप में) है।

जातिवाचक संज्ञा का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में

कभी कभी जातिवाचक संज्ञा का प्रयोग व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में किया जाता है। जैसे-

गोस्वामी जी ने रामचरित मानस की रचना की।

प्रस्तुत वाक्य में नियमतः तो गोस्वामी को जातिवाचक संज्ञा होना चाहिए। परन्तु वह यहां पर तुलसीदास जी के लिए प्रयुक्त है अर्थात व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयुक्त है।

इसी प्रकार कुछ अन्य उदाहरण देखिए-

पंडित जी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे।

यहां भी पंडित शब्द वैसे तो जातिवाचक संज्ञा है। परंतु प्रयुक्त हुआ है व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में।

संज्ञा का पद अन्वय- sangya in hindi

किसी शब्द का परिचय देना और वाक्य में उसका संबंध अन्य शब्दों से बताना ही पद अन्वय या पद परिचय कहलाता है।

जैसे- निशीथ के भाई अंशु ने विद्यालय में एक पत्र लिखा।

1- निशीथ शब्द का पद परिचय– संज्ञा, व्यक्तिवाचक, पुल्लिंग, एकवचन, संबंधकारक, क्रिया एवं कर्ता से सम्बंध है।

2- भाई– संज्ञा, व्जातिवाचक, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ताकारक, लिखा क्रिया का कर्ता है।

3- अंशु– संज्ञा, व्यक्तिवाचक, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ताकारक, लिखा क्रिया का कर्ता है।

4- विद्यालय– संज्ञा, जातिवाचक, पुल्लिंग, एकवचन, अधिकरणकारक, क्रिया के आधार पर आधार स्थल का बोध कराता है।

5- पत्र– संज्ञा, जातिवाचक, पुल्लिंग, एकवचन, कर्मकारक, लिखा क्रिया का कर्म है।

संज्ञा के भेद एक दृष्टि में

1- किसी व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम संज्ञा कहलाता है।

2- संज्ञा के पांच भेद होते हैं-
1- व्यक्तिवाचक संज्ञा 2- जातिवाचक संज्ञा 3- समूहवाचक संज्ञा 4- द्रव्यवाचक संज्ञा 5- भाववाचक संज्ञा

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