samas in hindi

samas – समास की परिभाषा, भेद और उदाहरण

हिंदी में समास को समझना थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए आज हम आपके लिए samas – समास की परिभाषा, भेद और उदाहरण नामक पोस्ट लेकर आये हैं। जिसमें samas की पूरी जानकारी बहुत ही सरल ढंग से समझाई गयी है। साथ ही अंत में आपकी समझ की जांच और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों एक प्रश्नावली भी दी गयी है।

समास परिचय- what is samas in hindi

विषय सूची

दो या दो से अधिक शब्दों के योग से जब एक नया शब्द बनता है तो उसे सामासिक शब्द कहते हैं और उन शब्दों के योग को समास- samas कहा जाता है। जैसे- कार्यकुशल शब्द कार्य और कुशल दो शब्दों के योग से बना है। जिसका अर्थ होता है कार्य में कुशल।

यहां कार्य और कुशल दोनों शब्दों को आपस में जोड़ने वाला शब्द है में। जब समास होता है तो इस ‘में’ शब्द का लोप हो जाता है।

समास (samas) की शब्दावली

पद (pad)

समास में जिन दो पदों का योग होता है। उनमें पहले पद को पूर्वपद या प्रथम पद कहते हैं और दूसरे पद को उत्तरपद या अंतिम पद कहते हैं। जैसे- ज्ञानसागर समास में ज्ञान प्रथम पद या पूर्वपद है जबकि सागर उत्तरपद या दूसरा पद कहलाता है।

समस्त पद

दो स्वतंत्र पदों के योग से समास (samas) प्रयोग द्वारा जो नया पद या शब्द बनता है, उसे समस्त पद या सामासिक पद कहते हैं। जैसे- ज्ञान और सागर दो पदों के योग से नया पद बनता है- ज्ञानसागर।
यह ज्ञानसागर समस्तपद या सामासिक पद कहा जाता है।

समास विग्रह (samas vigrah)

जब समस्त पद को तोड़ा या अलग किया जाता है तो उसे समास विग्रह कहते हैं।

समास की परिभाषा- Samas

समास शब्द सम् और अस् दो धातुओं के योग से बना है। इसका अर्थ संछेप होता है।
जब दो या दो से अधिक शब्दों को इस प्रकार रखा जाता है कि उनके आकार में कुछ कमी आ जाय तथा उनका अर्थ भी पूर्ण विदित हो, तो उसे समास कहा जाता है। जैसे- ज्ञानसागर जिसका अर्थ है ज्ञान का सागर।

समास की विशेषताएं

समास की निम्न विशेषताएं होती हैं–
1- समास कम से कम दो शब्दों या पदों के योग से बना होता है।
2- ऐसे मेल वाले दो या अधिक पद मिलकर एक हो जाते हैं।
3- मिलने वाले पदों के विभक्ति प्रत्यय का लोप हो जाता है।

समास के भेद- samas ke kitne bhed hote hain ?

samas
समास की परिभाषा और भेद

समास के 6 भेद हैं–
1- अव्ययीभाव समास 2- तत्पुरुष समास 3- कर्मधारय समास 4- द्विगु समास 5- द्वंद समास 6- बहुब्रीहि समास

कुछ विद्वानों के अनुसार समास samas के चार भेद ही होते हैं– अव्ययीभाव, तत्पुरुष, द्वंद और बहुब्रीहि। कर्मधारय और द्विगु समास वस्तुतः तत्पुरुष समास के अंतर्गत ही आते है। परंतु प्रचलन में इन्हें स्वतंत्र समास के रूप में मान्यता प्राप्त है। इस संस्कृत श्लोक में भी समाज के 6 भेद बताए गए हैं-


द्वन्द्वौ द्विगुरपि चाहं मद्गेहे नित्यमययीभावः।
तत्पुरुष कर्मधारय येनाहंस्याम्बहुब्रीहिः।।

अतः हम समास के 6 रूप के बारे में ही पढ़ेंगे।

1- अव्ययीभाव समास

इस समास में पहला पद अव्यय और दूसरा पद संज्ञा होता है। समस्त पद में अव्यय की ही प्रधानता रहती है। पूरा शब्द क्रिया-विशेषण के रूप में एक अव्यय की भांति प्रयोग होता है। जैसे-
प्रतिदिन – हर दिन। यहां प्रति अव्यय है और दिन संज्ञा दोनों के योग से प्रतिदिन शब्द बना। जो क्रिया विशेषण के रूप में प्रयोग होता है।

पहचान

इसमें प्रायः पहला पद अनु, आ, प्रति, भर, यथा, यावत, हर आदि होता है।

अव्ययीभाव समास के उदाहरण- samas vigraha examples in hindi

यथाशक्ति = यथा +शक्ति – शक्ति के अनुसार
यथाविधि = यथा + विधि – विधि के अनुसार
बारम्बार = बार + बार – बार-बार
प्रत्यक्ष = प्रति + अक्षि – अक्षि के प्रति,
समक्ष = सम् + अक्षि – अक्षि के सामने
यथार्थ = यथा + अर्थ – अर्थ के अनुसार
यथाकर्म = यथा +कर्म – कर्म के अनुसार
यथाशीघ्र = यथा + शीघ्र – जितना शीघ्र हो सके

प्रत्येक = प्रति + एक – एक-एक के प्रति
आजन्म = आ+ जन्म – जीवन भर
यथारुचि = यथा+ रुचि – रुचि के अनुसार
भरपेट = भर + पेट – पेट भर
बाकलम = बा + कलम – कलम के साथ
बेशर्म= बे + शर्म – बिना शर्म के

अनुरूप = अनु + रूप – रूप के अनुसार
प्रतिकूल = प्रति + कूल – इच्छा के विरुद्ध

2- तत्पुरुष समास # tatpurush samas

जिस समास में उत्तर पद प्रधान हो, वह तत्पुरुष समास कहलाता है। अर्थात इसमें बाद वाले पद का महत्व अधिक होता है। समस्त पद में विभक्ति के चिन्ह का लोप हो जाता है। जैसे- राजा का कुमार – राजकुमार, धर्म का ग्रंथ – धर्मग्रंथ

तत्पुरुष समास के भेद- types of samas in hindi

विभक्तियों के आधार पर तत्पुरुष समास के 6 भेद होते हैं। जो निम्नवत हैं–

1- द्वितीया तत्पुरुष (कर्म तत्पुरुष) चिन्ह- को

इसमें कर्म कारक विभक्ति के चिन्ह ‘को’ का लोप हो जाता है। जैसे- गगनचुम्बी – गगन को चूमने वाला, रथ को चलाने वाला – रथचालक।

द्वितीया तत्पुरुष के उदाहरण- examples

जेबकतरा – जेब को कतरने वाला
ग्रामगत – ग्राम को गया हुआ
चिड़ीमार – चिड़ियों को मारने वाला
सुखप्राप्त- सुख को प्राप्त करने वाला
पतितपावन – पतितों को पवित्र करने वाला
स्वर्गप्राप्त – स्वर्ग को प्राप्त
माखनचोर माखन को चुराने वाला
मोक्षप्राप्त – मोक्ष को प्राप्त
पाकेटमार – पॉकेट को मारने वाला

2- तृतीया तत्पुरुष (करण तत्पुरुष) विभक्ति चिन्ह – से

इसमें समस्त पद में करण कारक की विभक्ति अर्थात तृतीया विभक्ति के चिन्ह ‘से’ अथवा ‘के द्वारा’ का लोप होता है। जैसे- धन से हीन – धनहीन।

करण तत्पुरुष के उदाहरण- examples of samas

नेत्र से हीन – नेत्रहीन
रस से भरा – रसभरा
करुणा से पूर्ण – करुणापूर्ण
तुलसी के द्वारा किया हुआ – तुलसीकृत
अकाल से पीड़ित – अकालपीड़ित
रोग से ग्रस्त – रोगग्रस्त
शोक से आकुल – शोकाकुल
जल से सींचा हुआ – जलसिक्त
भय से आकुल – भयाकुल
मद से अंधा – मदान्ध
बिहारी द्वारा रचित – बिहारीरचित
मन से चाहा – मनचाहा
रेखा से अंकित – रेखांकित

3- सम्प्रदान तत्पुरुष (चतुर्थी तत्पुरुष) चिन्ह – के लिए

इस तत्पुरुष समास में चतुर्थी तत्पुरुष के विभक्ति चिन्ह के लिए का लोप हो जाता है। जैसे– गौ के लिए शाला – गौशाला

शिवार्पण – शिव के लिए अर्पण
ब्राह्मणदक्षिणा – ब्राह्मण के लिए दक्षिणा
देशभक्ति – देश के लिए भक्ति
मार्गव्यय – मार्ग के लिए व्यय
रसोईघर – रसोई के लिए घर
विधानसभा- विधान के लिए सभा
सभाभवन – सभा के लिए भवन
पुत्रशोक – पुत्र के लिए शोक
मालगोदाम – माल के लिए गोदाम
विद्यालय – विद्या के लिए आले
हथकड़ी – हाथ के लिए कड़ी
स्नानघर – स्नान के लिए घर

4- अपादान तत्पुरुष (पंचमी तत्पुरुष) चिन्ह से- SAMAS

अपादान तत्पुरुष समास के समस्त पद में पंचमी विभक्ति के चिन्ह ‘से’ का लोप हो जाता है। इस ‘से’ का प्रयोग अलग होने के अर्थ में होता है। जैसे – धन से हीन – धनहीन।

अपादान तत्पुरुष के उदाहरण

पथ से भ्रष्ट – पथभ्रष्ट
पद से च्युत – पदच्युत
धन से हीन – धन से हीन
गृह से विहीन – गृहविहीन
चिंता से मुक्त – चिंतामुक्त
बल से हीन – बलहीन
कर्म से विमुख – कर्मविमुख
ऋण से मुक्त – ऋणमुक्त
दोष से मुक्त – दोषमुक्त
लोक से परे – लोकोत्तर

सप्तमी तत्पुरुष (संबंध तत्पुरुष) चिन्ह का, की, के

इसमें सम्बन्धकारक की विभक्ति के चिन्ह का, की, के का लोप हो जाता है। जैसे – राजा की आज्ञा – राजाज्ञा

संबंध तत्पुरुष के उदाहरण # samas in hindi

गंगा का जल – गंगाजल
अन्न का दाता – अन्नतदाता
राजा का भवन – राजभवन
देश की सेवा – देशसेवा
राज्य का अध्यक्ष- राज्याध्यक्ष
राम का राज्य – रामराज्य
लोक का नायक – लोकनायक
चंद्र का उदय – चंद्रोदय
वीर का पुत्र – वीरपुत्र
सेना का नायक – सेनानायक
देवता का आलय – देवालय
पर के आधीन – पराधीन
शिव का आलय – शिवालय
गृह का स्वामी – गृहस्वामी

अधिकरण तत्पुरुष समास (सप्तमी तत्पुरुष)

अधिकरण तत्पुरुष में इसके विभक्ति चिन्ह में, पर का लोप होता है। जैसे- धर्म में वीर – धर्मवीर

अधिकरण तत्पुरुष के उदाहरण- samas vigraha examples in hindi

पुरुषों में सिंह – पुरुषसिंह
आपबीती – अपने पर बीती
कवियों में श्रेष्ठ- कविश्रेष्ठ
नरों में अधम – नराधम
सब में उत्तम – सर्वोत्तम
वन में वास – वनवास
स्वर्ग में वास करने वाला – स्वर्गवासी
शोक में मग्न – शोकमग्न
कला में प्रवीण – कलाप्रवीण
लोक में प्रिय – लोकप्रिय

तत्पुरुष समास के इन 6 भेदों के अलावा एक अन्य प्रमुख भेद भी है। जिसे नञ् समास कहा जाता है।

नञ् समास-samas

जिस समाज के पूर्वपद या प्रथम पद में नकारात्मक या निषेधसूचक शब्द लगे हों। उसे नञ् समास कहा जाता है। ये नकारात्मक शब्द हैं- न, ना, अन, अ, गैर आदि। जैसे- जो दिखाई न दे – अगोचर।

नञ् समास के उदाहरण

न चल – अचल
न जन्मा – अजन्मा
न अन्त – अनंत
न न्याय – अन्याय
न पवित्र – अपवित्र
न उचित – अनुचित
न पढ़ – अनपढ़
न धर्म – अधर्म

3- कर्मधारय समास # samas

इस समास में उत्तर पद प्रधान होता है। इसका प्रथम पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य (संज्ञा) होता है। इसे इस प्रकार भी कह सकते हैं कि विशेषण + विशेष्य = कर्मधारय
जैसे- लालमणि – लाल है जो मणि। यहां लाल विशेषण है और मणि विशेष्य जो एक संज्ञा है।

कर्मधारय समास के उदाहरण- examples

महादेव – महान है जो देव
अधमरा – आधा है जो मरा
महापुरुष – महान है जो पुरुष
नीलकंठ – नीला है जो कंठ
महाकवि – महान है जो कवि
महौषधि – महान है जो औषधि
पीतसागर – पीत है जो सागर
नराधम – अधम है नर जो
पीताम्बर – पीत है जो अम्बर
महावीर – महान है जो वीर
नीलकमल – नीला है जो कमल
परमेश्वर – परम् है जो ईश्वर
महात्मा – महान आत्मा है जो

जब इस समास में एक शब्द उपमान और दूसरा उपमेय होता है तब भी कर्मधारय समास होता है। इसके विग्रह में सदृश, रूपी, समान शब्दों का प्रयोग होता है। जैसे-

चरणकमल – कमल के समान चरण
देहलता – देह रूपी लता
चंद्रमुख – चंद्र के सदृश मुख
वायुवेग – वायु के समान वेग
लौहपुरुष – लोहे के समान पुरुष

4- द्विगु समास # samas

जिस समास का प्रथम पद संख्यावाचक और दूसरा पद संज्ञा होता है। उसे द्विगु समास कहते हैं। इससे किसी समूह या समाहार का ज्ञान होता है। जैसे- त्रिफला – तीन फलों का समूह। यहां पूर्वपद संख्यावाचक है जबकि उत्तरपद एक संज्ञा हैं।

द्विगु समास के उदाहरण-dvigu samas examples in hindi

चतुर्दिक – चार दिशाओं का समूह
त्रिभुज – तीन भुजाओं का समूह
चौराहा – चार राहों का समूह
नवग्रह – नौ ग्रहों का समाहार
त्रिलोक – तीन लोकों का समाहार
पंचवटी – पांच बातों का समाहार (समुदाय)
दोपहर – दो पहरों का समूह
पंचपात्र – पांच पात्रों का समाहार
नवरत्न – नव रत्नों का समाहार
सप्ताह – सात दिनों का समूह
तिरंगा – तीन रंगों का समूह
नवरात्र – नौ रात्रियों का समूह

5- द्वंद समास #

जिसके दोनों पद प्रधान हों, दोनों संज्ञा अथवा विशेषण हों, वह द्वंद समास कहलाता है। इसका विग्रह करने के लिए दोनों पदों के बीच में और अथवा या योजक अव्यय का प्रयोग किया जाता है। इसकी एक पहचान यह भी है कि समस्त पद के बीच में (-) चिन्ह का प्रयोग होता है।जैसे-

राजा-रानी – राजा और रानी।

द्वंद समास के भेद- Dvand samas ke bhed in hindi

द्वंद समास के मुख्यतः तीन भेद होते हैं-

1- इतरेतर द्वंद

इस द्वंद समास के दोनों पदों के बीच ‘और’, ‘तथा’ आदि योजक शब्दों का लोप होता है। अर्थात इस समाज में समान महत्व के दो शब्द ‘और’, ‘तथा’ आदि योजक शब्दों से जुड़े रहते हैं। जैसे-
राम-लक्ष्मण – राम और लक्ष्मण

इतरेतर द्वंद के उदाहरण

राम-कृष्ण – राम और कृष्ण
भाई-बहन – भाई और बहन
देश-विदेश – देश और विदेश
लोटा डोरी – लोटा और डोरी
लव-कुश – लव और कुश
माता-पिता – माता और पिता
नमक-मिर्च – नमक और मिर्च

2- समाहार द्वंद # samas

जिस द्वंद समास से उसके अर्थ के अतिरिक्त उस जैसे अन्य अर्थों का भी ज्ञान होता है। उसे समाहार द्वंद कहते हैं। जैसे-

रोटी-दाल – रोटी और दाल, आजीविका, भोजन के सभी प्रमुख पदार्थ के अर्थ में।

समाहार द्वंद के उदाहरण

अन्न-जल – अन्न और जल, सम्पूर्ण भोजन के अर्थ में।
रुपया-पैसा – रुपया और पैसा, संपत्ति के अर्थ में।
मोटा-ताजा – मोटा और ताजा, हृष्ट-पुष्ट।
कहा-सुनी – कहना और सुनना, झगड़ा।
गाय-भैंस – गाय और भैंस, जानवरों के अर्थ में।

3- वैकल्पिक द्वंद- समास की परिभाषा, भेद और उदाहरण

जहां दोनों पदों के बीच ‘या’ आदि योजक शब्दों का लोप पाया जाता है, वहां वैकल्पिक द्वंद होता है। वैकल्पिक द्वंद दो विरोधी भावों के बोधक शब्दों के मेल से बनता है। जैसे- भला-बुरा – भला या बुरा।

पाप-पुण्य – पाप या पुण्य
छोटा-बड़ा – छोटा या बड़ा।
भूखा-प्यासा – भूखा या प्यासा।
ऊंचा-नीचा – ऊंचा या नीचा।

6- बहुब्रीहि समास – samas hindi me

इस समास में कोई भी शब्द प्रधान नहीं होता। दोनों शब्द मिलकर एक नया अर्थ प्रकट करते हैं। जैसे- चतुर्भुज – चार भुजाएं हैं जिसकी अर्थात विष्णु। यहां चतुः और भुज दोनों पद मिलकर एक नया अर्थ प्रकट करते हैं।

बहुब्रीहि समास के उदाहरण

त्रिनेत्र – तीन नेत्र हैं जिनके (शिव)
लंबोदर – लम्बा है उदर जिनका (गणेश)
दशमुख – दश मुख हैं जिसके (रावण)
सहस्राक्ष – सहस्र आंखें हैं जिनकी (इंद्र)
खगेश – खगों के राजा हैं जो (गरुण)
पीताम्बर – पीला है अम्बर जिनका (कृष्ण)
निशाचर – निशा में विचरण करने वाले (राक्षस)
विषधर – विष को धारण करने वाला (सर्प)
घनश्याम – घन के समान श्याम है जो (कृष्ण)
महावीर – महान वीर है जो (हनुमान)
पंकज – पंक में पैदा होता है जो (कमल)

कर्मधारय और बहुब्रीहि समास में अंतर

इन दोनों समासों में बहुत भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। इनके अंतर को समझने के लिए इनके विग्रह पर ध्यान दें आवाश्यक है। कर्मधारय समास में एक पद विशेषण या उपमान होता है और दूसरा पद विशेष्य या उपमेय। जैसे- नीलगगन इसमें नील विशेषण के रूप में है और गगन विशेष्य।

जबकि बहुब्रीहि समास में समस्त पद ही किसी संज्ञा के विशेषण का कार्य करता है। जैसे- पीतांबर, पीला है वस्त्र जिनका अर्थात श्रीकृष्ण। इसमें पीतांबर शब्द ही श्रीकृष्ण की विशेषता बताता है। smas in hindi उदाहरण-

नीलकंठ – नीला है जो कंठ (कर्मधारय)
नीलकंठ- नीला है कंठ जिनका अर्थात शिव (बहुब्रीहि)

बहुब्रीहि और द्विगु समास में अंतर- samas

इसी प्रकार द्विगु समास में पूर्वपद संख्या वाचक विशेषण होता है और उत्तरपद विशेष्य संज्ञा। जबकि बहुब्रीहि की विशेषता है कि की इसमें समस्त पद ही विशेषण का कार्य करता है। जैसे –

चतुर्भुज – चार भुजाओं का समूह (द्विगु)। यहां प्रथम पद चतुः संख्यावाचक विशेषण है और दूसरा पद संज्ञा।

चतुर्भुज- चार भुजाएं हैं जिसकी अर्थात विष्णु (बहुब्रीहि)। यहां समस्त पद चतुर्भुज ही विशेषण का कार्य कर रहा है, यानी चार भुजाएं ही जिनकी विशेषता हैं।

द्विगु एवं कर्मधारय में अंतर

इन दोनों में कई स्पष्ट अंतर हैं। जैसे-

1- द्विगु समास में पूर्वपद सदैव संख्या वाचक विशेषण होता है साथ ही वह दूसरे पद की संख्या बताता है। जबकि कर्मधारय का एक पद विशेषण तो होता है। किंतु वह संख्यावाचक कभी नहीं होता है।

2- द्विगु का पहला पद ही हमेशा विशेषण होता है। जबकि कर्मधारय में ऐसा नहीं है। उसमें कोई भी पद दूसरे पद का विशेषण हो सकता है।

संधि और समास में अंतर # samas

सन्धि और समास में निम्न अंतर हैं-

1- इन दोनों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि संधि वर्णों या अक्षरों का मेल है जबकि समास शब्दों का मेल है।

2- सन्धि में जब वर्णों के योग होता है। तो यौगिक शब्द में वर्ण परिवर्तित होकर दूसरा वर्ण भी आ जाता है। जबकि समास में ऐसा नहीं होता।

3- संधि को तोड़ने को संधि विच्छेद कहा जाता है। जबकि समास के पदों को तोड़ने को समास विग्रह कहते हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वस्तुनिष्ठ प्रश्न – optional question on samas

1- निम्नांकित में कौन सा पद अव्ययीभाव समास है-
(क) आचारकुशल (ख) कुमारी
(ग) प्रतिदिन (घ) गृहगत

2- समास का शाब्दिक अर्थ होता है-
(क) संछेप (ख) विस्तार
(ग) विग्रह (घ) विच्छेद

3- साग-पात में कौन सा समास है-
(क) अव्ययीभाव (ख) कर्मधारय
(ग) द्विगु (घ) द्वंद

4- युधिष्ठिर में कौन सा समास है-
(क) तत्पुरुष (ख) बहुब्रीहि
(ग) कर्मधारय (घ) द्वंद

5- द्विगु समास का उदाहरण कौन सा है–
(क) अन्वय (ख) दिन-रात
(ग) चतुरानन (घ) त्रिभुवन

6- यथाशक्ति का सही विग्रह क्या होगा–
(क) जैसी शक्ति (ख) जितनी शक्ति
(ग) शक्ति के अनुसार (घ) यथा जो शक्ति

7- लंबोदर में कौन सा समास है-
(क) द्विगु (ख) द्वंद
(ग) कर्मधारय (घ) बहुब्रीहि

8- देवासुर में कौन सा समास है–
(क) बहुब्रीहि (ख) कर्मधारय
(ग) द्वंद (घ) तत्पुरुष

9- दीनानाथ में कौन सा समास है-
(क) कर्मधारय (ख) बहुब्रीहि
(ग) द्विगु (घ) द्वंद

10- मुख-दर्शन में कौन सा समास है-
(क) द्विगु (ख) द्वंद
(ग) कर्मधारय (घ) तत्पुरुष

11- कौन सा शब्द बहुब्रीहि का सही उदाहरण है-
(क) निशिदिन (ख) त्रिभुवन
(ग) पंचानन (घ) पुरुषसिंह

12- सुपुरुष में कौन सा समास है–
(क) तत्पुरुष (ख) अव्ययीभाव
(ग) कर्मधारय (घ) द्वंद

13- देशांतर में कौन सा समास है-
(क) बहुब्रीहि (ख) द्विगु
(ग) कर्मधारय (घ) तत्पुरुष

14- निम्नलिखित में से कर्मधारय समास किस्में है-
(क) चक्रपाणि (ख) चतुर्युगम
(ग) नीलोत्पलम (घ) माता-पिता

15- अनायास में कौन सा समास है-
(क) नञ् (ख) द्वंद
(ग) द्विगु (घ) अव्ययीभाव

16- विशेषण और विशेष्य के योग से समास बनता है–
(क) द्विगु (ख) द्वंद
(ग) कर्मधारय (घ) तत्पुरुष

17- निम्न में से किसमें द्विगु समास है-
(क) आजीवन (ख) भूदान
(ग) सप्ताह (घ) पुरुषसिंह

18- जितेंद्रिय में कौन सा समास है–
(क) द्वंद (ख) बहुब्रीहि
(ग) तत्पुरुष (घ) कर्मधारय

19- आजन्म शब्द ….…समास का उदाहरण है–
(क) अव्ययीभाव (ख) तत्पुरुष
(ग) द्वंद (घ) द्विगु

20- धक्का-मुक्की में कौन सा समास है–
(क) कर्मधारय (ख) द्विगु
(ग) द्वंद (घ) तत्पुरुष

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उत्तरमाला

उत्तर- 1(ग). 2(क). 3(घ). 4(ख). 5(घ). 6(ग). 7(घ). 8(ग). 9(क). 10(घ). 11(ग). 12(ग). 13(घ). 14(ग). 15(क). 16(ग). 17(ग). 18(ख). 19(क). 20(ग).

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