सकारात्मक सोच का जीवन पर असर

सकारात्मक सोच का जीवन पर असर

सकारात्मक सोच का महत्व आज के समय से बहुत बढ़ जाता है. आजकल हम कोरोना (corona) की भीषण त्रासदी से जूझ रहे हैं.  अभी तक कोई टीका (vaccine) न बन पाने के कारण इससे बचाव के दो ही तरीके हैं. पहला सामाजिक दूरी (social distensing) और दूसरा रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) में वृद्धि. रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के लिए डाक्टरों द्वारा बहुत से उपाय  बताये गए हैं.

यहाँ हम बात करेंगे एक अन्य कारक सकारात्मक सोच (positive thinking) की. जो कि न केवल  रोग प्रतिरोधक क्षमता बल्कि हमारे शारीरिक और मानसिक तंत्र को प्रभावित करता है.
                    अगर कहा जाय कि हमारे विचार हमारी मानसिक स्थिति को पूर्णतया नियंत्रित करते हैं तो गलत नहीं होगा. आपकी सोच आपके स्वभाव में झलकती है. अगर आप किसी चीज के सकारात्मक पक्ष को देखते हैं तो आप निश्चित ही उत्साहपूर्ण रहेंगे.
समस्याओं में संभावनाएं खोजते हैं, बाधाओं में चुनौतियाँ देखते हैं, तो इस कठिन समय को भी आप आसानी से पार कर  लेंगे. हम में से बहुत से लोग वर्तमान संकट को लेकर बेहद चिंतित हैं. उनका कहना है कि इस समय सुरक्षित रहना ही सबसे बड़ी चुनौती है.
लेकिन हम विचार करें कि क्या हम पहले पूर्णतया सुरक्षित थे ? जवाब होगा, नहीं. तब हमें चिंता थी अन्य बीमारियों की, एक्सीडेंट की, लूट की, फ्राड की, जॉब की, पढाई की, बच्चों की, बिजनेस की. इन्ही चिंताओं में आप इसे भी जोड़ लीजिये.
लेकिन हमें चिंता को अपना स्वभाव नहीं बनाना है. किसी समस्या के आने पर चिंतित होना मानव स्वभाव है और यह आवश्यक भी है क्योंकि यह हमें उस समस्या के प्रति सतर्क नजरिया रखने के लिए प्रेरित करता है. परन्तु जब हम चिंता समाधान के लिए न करके समस्या के लिए करते हैं तो यह स्थिति खतरनाक होती है.
यह हमारे मन को अशांत करती है और नकारात्मक विचारों को बढ़ावा देती है. चूंकि हममे से हर व्यक्ति समस्याओं से घिरा है इसलिए धीरे धीरे यह चिंता हमारे स्वभाव का हिस्सा बन जाती है और कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बनती है. हमारे विचारों को नकारात्मक रूप देती है. 
                 इसलिए अब हमें इसे बदलना है. हमें एक वाक्य याद रखना है की अगर समस्या है तो उसका भी समाधान भी है. इसलिए हमें समाधान का चिंतन करना है न कि समस्या की चिंता करनी है. यही सूत्रवाक्य हमें नकारात्मक विचारों से बचाएगा और हमें समस्याओं से संघर्ष की शक्ति भी देगा.
                एक सकारात्मक थिंकिंग जीवन और संघर्ष के प्रति हमारे नजरिये को पूरी तरह से बदल सकती है. गिलास आधा भरा है या आधा खाली है ये आपके नजरिये पर निर्भर है. लेकिन एक बार गिलास आधा भरा है सोच कर तो देखिये. आपका नजरिया ही बदल जायेगा.
आपको नयी ऊर्जा और उत्साह का अहसास होगा. संघर्ष करने के लिए नयी जिजीविषा उत्पन्न होगी. इसलिए अपनी सोच को सकारात्मक रखिये. समस्याएँ आती जाती रहेंगीं. सकारात्मक सोच आपको उन समस्याओं से निपटने के लिए आत्मविश्वास प्रदान करेगी और आप निश्चित ही सभी समस्याओं से पार पा जायेंगे. इसलिए सकारात्मक रहिये, स्वस्थ रहिये
         इस पोस्ट के विषय में आपके कमेंट्स का स्वागत है.
  

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