अकबर बीरबल कहानी

सबसे प्रिय कौन- अकबर-बीरबल कहानी

कहानियों (hindi story) की श्रृंखला में आज से हम अकबर बीरबल की कहानियों (akbar birbal) की चुनिंदा मजेदार कहानियां प्रस्तुत कर रहे हैं। जिसके अंतर्गत पहली कहानी सबसे प्रिय कौन- अकबर-बीरबल कहानी प्रस्तुत है-

सबसे प्रिय कौन- अकबर-बीरबल कहानी

एक बार बादशाह अकबर दरबार में बैठे थे। उनकी गोद में उनका पुत्र सलीम था। उसकी बालसुलभ हरकतों को देखकर बादशाह आनन्दित हो रहे थे। साथ ही उन्हें उस पर बहुत प्यार भी आ रहा था।

उस समय बादशाह को लग रहा था कि संसार में पुत्र से प्यारा कुछ भी नहीं है। इस विचार पर दरबारियों की सम्मति जानने के लिए उन्होंने प्रश्न किया कि संसार में मनुष्य को सर्वाधिक प्रिय क्या है ?

सभी दरबारी विचार करने लगे कि क्या उत्तर दिया जाय ? क्योंकि दिया गया उत्तर बादशाह को पसंद न आया तो वे नाराज हो सकते हैं। सबने मिलकर उस समय की परिस्थिति पर विचार किया तो पाया कि बादशाह पुत्र के साथ खेल रहे हैं।

इसलिए इसी संबंध में उत्तर देना ठीक है। सबने सर्वसम्मति से उत्तर दिया कि महाराज इस संसार में पुत्र से प्रिय कुछ भी नहीं है। बादशाह अपने विचारों की पुष्टि देखकर बहुत खुश हुए। संयोगवश उस दिन बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं थे।

अगले दिन जब बीरबल दरबार में आये तो बादशाह ने उनसे भी वही प्रश्न किया। इस पर बीरबल ने उत्तर दिया कि महाराज इस संसार में प्रत्येक प्राणी को अपना जीवन ही सबसे अधिक प्रिय है। बादशाह इस उत्तर से बहुत नाराज हुए।

उन्होंने बीरबल से कहा, “अपने कथन को साबित करो अन्यथा तुम्हे दंड दिया जाएगा।” बीरबल तो अत्यधिक बुद्धिमान और हाजिरजवाब थे, उन्होंने कहा, “ठीक है महाराज, मैं अपने कथन को साबित कर सकता हूँ। मुझे दो घण्टे का समय दीजिये।”

इसके बाद बीरबल दरबार से निकल कर शाही बाग में गया और बागवान से पानी के एक बड़े हौज को खाली करने को कहा। उसके बीरबल बाजार गया और एक बंदरिया और उसके छोटे बच्चे को खरीद लाया।

सबसे प्रिय कौन- अकबर-बीरबल कहानी
सबसे प्रिय कौन- अकबर-बीरबल कहानी

यह सब इंतजाम करके वह वापस दरबार में पहुंचा और बादशाह से बोला, “महाराज ! सारा इंतजाम हो गया है। अब मैं अपने कथन को प्रमाणित कर सकता हूँ कि हर प्राणी को अपनी जान ही सबसे ज्यादा प्यारी होती है। लेकिन इसके आपको शाही बाग में चलना पड़ेगा।”

बादशाह सभी दरबारियों के साथ शाही बाग में पहुंचे। तब बीरबल ने उस बंदरिया को बच्चे सहित खाली हौज में बैठाने का आदेश दिया। फिर बागवान को हौज में पानी भरने का आदेश दिया। धीरे-धीरे हौज में पानी भरने लगा।

जैसे जैसे हौज में पानी भरने लगा। वैसे वैसे बंदरिया अपने बच्चे को बचाने का प्रयास करने लगी। जैसे जैसे पानी बढ़ने लगा बंदरिया अपने बच्चे को ऊपर उठाने लगी। एक समय ऐसा आया कि बंदरिया केवल एक हाथ में अपने बच्चे को उठाकर पानी से बचाने का प्रयत्न कर रही थी।

यह दृश्य देखकर अकबर बादशाह बोले, “देखो मेरी बात सही है। हर प्राणी के लिए उसकी संतान ही सबसे प्रिय होती है।” तब बीरबल बोले,”महाराज थोड़ा धैर्य रखें। अभी बंदरिया के प्राणों पर नही बन आई है।”

थोड़ी देर में पानी और भर गया। स्थिति ये हो गई कि अब पानी बंदरिया के नाक और मुंह में घुसने लगा। अब उसके लिए सांस लेना कठिन हो गया। फिर वह हुआ जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी।

बंदरिया ने एक अप्रत्याशित निर्णय लिया। उसने अपने पुत्र को नीचे पानी में डुबाया और उसके ऊपर चढ़ कर पानी से बचने का प्रयत्न करने लगी। बीरबल ने तुरंत पानी बंद करने का आदेश दिया और सोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

बीरबल ने कहा, “हुजूर ! मुझे लगता है कि अब कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। मनुष्य के लिए सर्वाधिक प्रिय उसका स्वयं का जीवन ही है। बादशाह ने बीरबल की बात को स्वीकार किया।

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