मोरल स्टोरी- भ्रातृप्रेम

मोरल स्टोरी- दो भाइयों का प्रेम

मोरल स्टोरी- दो भाइयों का प्रेम

दो भाइयों के निःस्वार्थ प्रेम पर आधारित मोरल स्टोरी- दो भाइयों का प्रेम एक इमोशनल कहानी है। जो भाइयों के गहरे प्रेम को दिखाती है। साथ ही यह कहानी हमें एक सीख भी प्रदान करती है।

मोरल स्टोरी- दो भाइयों का प्रेम

एक गांव में दो भाई रहते थे। बड़े भाई का नाम महेंद्र और छोटे का नाम धीरेंद्र था। दोनों भाइयों में बड़ा प्रेम था। माता पिता नहीं थे। तो सारी जिम्मेदारी महेंद्र के ऊपर थी। महेंद्र विवाहित था और धीरेंद्र अविवाहित।

धीरेंद्र काम में अपने बड़े भाई का हाथ तो बटाता था। लेकिन साथ ही वह यार दोस्तों के साथ खूब मौज भी करता था। धीरेंद्र के दोस्तों का उसके घर आना जाना लगा ही रहता था।

दोस्तों के आने में चाय नाश्ते और भोजन का खर्च भी लगता था। यह बात महेंद्र की पत्नी को बिल्कुल अच्छी नहीं लगती थी। इसलिए उसने धीरेंद्र के खिलाफ अपने पति के कान भरने शुरू कर दिए।

मोरल स्टोरी- दो भाइयों का प्रेम
मोरल स्टोरी- दो भाइयों का प्रेम

जिसकी वजह से दोनों भाइयों में झगड़े होने शुरू हो गए। एक दिन दोनों ने आपस में बैठकर विचार किया। इससे पहले कि आपसी संबंध ज्यादा खराब हो जाएं। उन्हें अलग हो जाना चाहिए।

फिर दोनों भाइयों में जमीन जायदाद का बंटवारा हो गया। खेती के बारे में यह निर्णय हुआ कि जो भी अनाज मिलेगा। वह दोनों में आधा-आधा बंट जाएगा। दोनों भाई अलग अलग रहने लगे।

महेंद्र की पत्नी बहुत खुश थी। क्योंकि अब उसे धीरेंद्र के दोस्तों के लिए चाय नाश्ता नहीं बनाना पड़ता था। लेकिन दोनों भाई खुश नहीं थे। बंटवारा हो जाने के बावजूद उनका प्रेम कम नहीं हुआ था।

फसल पक गयी। दोनों भाइयों ने उसे बराबर बराबर बांट कर वहीं खेत में ढेरी लगा दी। उसके बाद महेंद्र अपने छोटे भाई से बोला, “देखो धीरेंद्र, तुम्हारे दोस्त बहुत हैं। उनको खिलाने पिलाने में काफी अनाज लगता है। तुम अकेले हो। सही देखभाल न होने से कुछ अनाज खराब भी हो जाता है। इसलिए तुम पांच बोरी अनाज ज्यादा ले लो।”

इसपर धीरेंद्र ने उत्तर दिया, “नहीं भैया, मुझे ज्यादा अनाज की जरूरत नहीं है। लेकिन आपका परिवार है। बच्चे हैं। इसलिए आपको अधिक अनाज की जरूरत है। आप पांच बोरी अनाज अधिक ले लो।”

इस तरह दोनों भाई एक दूसरे को अधिक अनाज लेने के लिए कहते रहे। लेकिन कोई राजी नहीं हुआ। अंततः दोनों ने फैसला किया कि रात हो गयी है। अनाज की बोरियां रात में यहीं रहेंगी। हम लोग सुबह आकर इन्हें ले जाएंगे।

दोनों भाई अपने अपने घर आ गए। खा पीकर लेट गए। लेकिन दोनों को नींद नहीं आ रही थी। महेंद्र सोच रहा था धीरेंद्र अभी छोटा है, नासमझ है। ख़र्चवाह है। वह अनाज का सही रखरखाव नहीं कर पायेगा।

उसे अधिक अनाज मिलना चाहिए। जिससे पूरा साल चल जाये। लेकिन वह अधिक अनाज लेगा नहीं। मुझे क्या करना चाहिए? फिर महेंद्र के दिमाग में एक विचार आया।

वह चुपचाप उठा और खेत में पहुंचा। रात के अंधेरे में ही उसने अपनी ढेरी में से पांच बोरी गेंहू निकालकर धीरेंद्र की ढेरी में मिला दिया। इसके बाद वह घर आकर चैन से सो गया।

इधर धीरेंद्र को भी बेचैनी के कारण नींद नहीं आ रही थी। वह सोच रहा था कि भैया बड़े होने के कारण संतोष कर रहे हैं। जबकि उनका परिवार बड़ा है। जिम्मेदारियां भी अधिक हैं। उन्हें अधिक अनाज मिलना चाहिए। मैं अपने भाई के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा।

वह भी उठा और अपनी ढेरी से पांच बोरी गेहूं महेंद्र की ढेरी में रख आया। सुबह दोनों भाई अनाज लाने खेत पहुचे। तो दोनों ढेरियों को बराबर देखकर चौंक गए। बात समझ में आते ही दोनों एक दूसरे के गले लग गए।

कहानी से सीख । moral of story

मोरल स्टोरी- दो भाइयों का प्रेम से हमें शिक्षा मिलती है कि खुद से ज्यादा हमें दूसरों का ध्यान रखना चाहिये। अगर हम दूसरों के बारे में सोचते हैं तो वे भी हमारे बारे में जरूर सोचेंगे।

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