मोरल स्टोरी- लोभ का घड़ा

दोस्तों ! आज हम आपके लिए मोरल स्टोरी- लोभ का घड़ा लेकर आये हैं. ये moral story हमें एक महत्वपूर्ण शिक्षा देती है. जिसे हम अपने जीवन में उतार लें तो हमारी कई समस्याएँ हल हो जायेंगीं. तो चलिए शुरू करते हैं लोभ का घड़ा- कहानी.

मोरल स्टोरी- लोभ का घड़ा

राजा प्रसेनजित के राज्य में एक नाई रहता था। अपनी थोड़ी सी आय में वह पूरी तरह संतुष्ट था। राजा के दरबार से जो वेतन मिलता था। उसी में उसका पूरा परिवार बड़े आराम से गुजारा कर लेता था।

मोरल स्टोरी- लोभ का घड़ा
लोभ का घड़ा- कहानी

एक दिन नाई कहीं जा रहा था। रास्ते में उसे एक पीपल का पेड़ मिला। जैसे ही वह पीपल के पेड़ के नीचे से गुजरा। उसे एक आवाज सुनाई पड़ी- “सात घड़ा धन लेगा?” उसने हैरान होकर इधर-उधर देखा।

लेकिन कहीं कोई नहीं दिखाई दिया। तब तक उसे फिर वही आवाज सुनाई दी- “सात घड़ा धन लेगा?” नाई के मन में लोभ आ गया। उसने सोचा कि बिना कुछ किये अगर धन मिल रहा है। तो लेने में क्या हर्ज है?

उसके ऐसा सोचते ही आवाज आई- “ठीक है, सात घड़ा धन तेरे घर पर पहुंच चुका है।” नाई जल्दी-जल्दी घर पहुंचा। वहां जाकर उसने देखा कि सात घड़े सचमुच रखे हैं। वह बहुत प्रसन्न हुआ।

नाई ने एक-एक करके सभी घड़ों को खोलकर देखा। सभी सोने चांदी से पूरे भरे हुए थे। लेकिन जब उसने सातवां घड़ा खोला तो वह दुखी हो गया। क्योंकि सातवां घड़ा थोड़ा सा खाली था।

उसने सोचा कि यदि यह भी पूरा भरा होता तो कितना अच्छा होता! उसने सातवें घड़े को भी पूरा भरने का निश्चय किया। घर में जो भी सोने चांदी का सामान था। वह सब उसने उसमें डाल दिया। लेकिन घड़ा नहीं भरा।

फिर उसने अपनी पत्नी के गहने भी घड़े में डाल दिये। लेकिन घड़ा नहीं भरा। अब तो नाई को घड़े को भरने की धुन सवार हो गयी। उसने अपने वेतन का एक बड़ा हिस्सा उस घड़े में डालना शुरू कर दिया।

लेकिन घड़ा वैसा ही रहा। फिर उसने राजा से अपना खर्च न चलने की बात कहकर वेतन बढ़ाने की विनती की। राजा ने उसका वेतन दोगुना कर दिया। अब उसने और ज्यादा पैसे घड़े में डालने शुरू कर दिए।

घड़े पर फिर भी कोई असर नहीं पड़ा। वह उतना ही खाली रहा। घड़े को भरने की अपनी धुन के चक्कर में उसने पूरा वेतन डालना शुरू कर दिया। लेकिन घड़ा नहीं भरा।

नाई की सनक से उसके परिवार को बहुत तकलीफ उठानी पड़ी। उनको अपने खर्च और खाने पीने की भी तंगी होने लगी। नाई लोगों से मांग कर काम चलाने लगा। एक दिन उसने राजा से कुछ पैसे मांगे।

तक राजा ने कहा, “क्यों रे! पहले तेरा वेतन कम था। तब तू बड़ा संतुष्ट था। अब तेरा वेतन दोगुना हो गया है। तब भी तुझे पूरा नहीं पड़ता है। कहीं तू सात घड़ा धन तो नहीं ले आया।”

यह सुनकर नाई हक्का बक्का रह गया। उसने धीमे स्वर में पूछा, “आपको किसने बताया?” राजा ने हंसकर कहा, “मूर्ख! वह यक्ष का धन है। वह खर्च करने के लिए नहीं इकट्ठा करने के लिए है। एक बार वह मुझे भी सात घड़े धन देने की बात कह रहा था।

जब मैंने पूछा कि यह धन रखने के लिए है या खर्च करने के लिए। तो वह बिना जवाब दिए भाग गया। उन घड़ों को तुरंत वापस कर आ। तू जिंदगी भर भरता रहेगा तो भी वह नहीं भरेगा। वह लोभ का घड़ा है। जो कभी नहीं भरता।

बात नाई की समझ में आ गयी। वह भाग कर पेड़ के नीचे पहुंचा और सात घड़े धन वापस लेने की प्रार्थना की। वहां से आवाज आई- “ठीक है।” जब नाई वापस घर पहुंचा तो उसने देखा कि सातों घड़े गायब हो चुके थे।

दुख की बात बस इतनी थी कि इतने दिनों में नाई ने जो धन घड़े में डाला था। वह भी चला गया था।

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कहानी से सीख- Moral of Story

मोरल स्टोरी- लोभ का घड़ा हमें सिखाती है कि लोभ चाहे किसी भी चीज का हो कभी घटता नहीं है। बल्कि बढ़ता ही जाता है। इसलिए जो अपने पास है उसी में संतुष्ट रहना चाहिए। अन्यथा लोभ के चक्कर में अपनी पूंजी भी गंवानी पड़ सकती है।

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