कमजोरी बनी ताकत- कहानी

कमजोरी बनी ताकत- कहानी | Story in Hindi

कमजोरी बनी ताकत- कहानी यह बताती है कि अगर हमारे अंदर सफलता पाने की दृढ इच्छा है तो कोई भी कमजोरी हमें रोक नहीं सकती। बल्कि अपनी लगन और इच्छाशक्ति के बल पर हम अपनी कमजोरियों को भी अपनी शक्ति बना सकते हैं।

कमजोरी बनी ताकत- कहानी
कमजोरी बनी ताकत- कहानी

अमेरिका में सोलह साल का एक लड़का था। एक सड़क दुर्घटना में उसका बायां हाथ चला गया। इसकी वजह से वह हीन भावना से ग्रस्त हो गया था। वह लोगों से मिलने जुलने में झिझक महसूस करने लगा। पढ़ाई में भी उसकी स्थिति कमजोर हो गयी।

वस्तुतः एक हाथ न होने की वजह से वह स्वयं को दूसरों से कमजोर समझता था। इसलिए उसने अपने पिता से कहा कि वह जूडो कराटे सीखना चाहता है। उसके पिता ने सोचा कि एक हाथ का लड़का जूडो कराटे कैसे सीखेगा ? फिर भी वे लड़के का मन रखने के लिए उसे शहर के सबसे अच्छे कराटे कोच के पास लेकर गए।

कोच का नाम सेंसी था। उन्होंने लड़के को देखा और उससे पूछा, “क्या तुम सचमुच सीखना चाहते हो ? क्योंकि इसमें बहुत मेहनत और समय लगता है। क्या तुम्हारे पास पर्याप्त समय और धैर्य है ?”

लड़के ने उत्तर दिया, “जी हाँ। मैं पूरी लगन और मेहनत से सीखने को तैयार हूँ। तब सेंसी ने कहा, ” तुम कल से आ सकते हो।” दूसरे दिन से लड़का प्रतिदिन जूडो कराटे सीखने लगा। तीन महीने तक लड़के ने पूरी लगन से कोच की बताई प्रत्येक बात का पालन किया।

लेकिन वह देख रहा था कि कोच उसको केवल एक ही दांव सिखाते हैं। बार बार केवल उसी दांव की प्रैक्टिस कराते हैं। एक दिन उसने सेंसी से पूछ ही लिया, ” सर, तीन महीने हो गए। आपने मुझे केवल एक ही दांव सिखाया है। जबकि दूसरे लड़कों को इन तीन महीनों में आपने कई दांव सिखा दिए हैं।

सेंसी ने कहा, ” तुम्हारे लिए यही एक दांव ही पर्याप्त है। तुम्हें दूसरा कोई दांव सीखने की जरूरत नहीं है।” कोच की बात से लड़का संतुष्ट तो नहीं हुआ। लेकिन वह अपने कोच का बहुत विश्वास करता था। इसलिए उसने अपना पूरा ध्यान उसी दांव में महारत हासिल करने में लगा दिया।

दो महीने बाद शहर में जूडो कराटे की प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। सेंसी लड़के को भी उस प्रतियोगिता में लेकर गया। लड़का प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने से झिझक रहा था। उसे लग रहा था कि उसका एक हाथ भी कम है और उसने केवल एक ही दांव सीखा है। वह पूरी तरह प्रशिक्षित इन लड़कों का सामना कैसे करेगा ?

लेकिन कोच सेंसी ने उसे हिम्मत दी और कहा, ” तुम कुछ मत सोचो, बस आज तक तुमने जो भी सीखा है, उसी का प्रयोग करना। तुम जरूर जीतोगे।” लड़के ने अपने शुरुआती मैच आसानी से जीत लिए। उसका आत्मविश्वास कुछ बढ़ा।

सेमीफाइनल में मुकाबला कुछ देर चला। लेकिन अपने सीखे एक ही दांव से उसने वह भी जीत लिया। लड़का फाइनल में पहुँच चुका था। दर्शक भी रोमांचित थे कि सिर्फ एक हाथ से लड़के ने कई प्रतिद्वंदियों को हरा दिया।

फाइनल में उसका मुकाबला एक लंबे तगड़े लड़के से था। दर्शकों को लग रहा था कि वह उसका मुकाबला नहीं कर पायेगा। लेकिन अब उसका आत्मविश्वास जाग चुका था। रेफरी को भी लग रहा था कि यह बराबरी का मुकाबला नहीं है। वह मैच को रोक देना चाहता था। लेकिन सेंसी ने मना कर दिया।

लड़के का प्रतिद्वंद्वी अपने से कमजोर और एक हाथ से विकलांग लड़के को देखकर थोड़ा लापरवाह हो गया था। वह अपने बचाव पर कम ध्यान दे रहा था और लगातार आक्रमण कर रहा था। इसी से लड़के को मौका मिला और अपने एकमात्र दांव से उसने अपने प्रतिद्वंद्वी को पटक दिया।

लोग खुशी और आश्चर्य से चिल्ला उठे। स्वयं लड़के को भी विश्वास नहीं हो रहा था कि उसने प्रतियोगिता जीत ली है। वापस लौटते समय उसने कोच सेंसी से पूछा, ” सर, मैं तो केवल एक ही दांव जानता हूँ मैंने कैसे इन पूर्ण प्रक्षिक्षण प्राप्त लड़कों को हरा दिया ?”

तब सेंसी ने बताया, ” तुमने केवल एक ही दांव पर चार महीने मेहनत की। इसलिए इस दांव में तुम्हें महारत हासिल हो गई है। बाएं हाथ को पकड़कर ही इस दांव को काटा जा सकता है। जोकि तुम्हारे पास नहीं है। इस प्रकार तुम्हारा यह दांव अजेय हो गया। तुम्हारी कमजोरी ही तुम्हारी ताकत बन गयी।

कहानी से सीख

कमजोरी बनी ताकत- कहानी हमें सिखाती है कि अगर हम दृढ़निश्चय और लगन से मेहनत करें तो हमारी कमजोरी भी हमारी ताक़त बन सकती है।

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