हिंदी कहावतें अर्थ सहित

125+ हिंदी कहावतें अर्थ सहित- hindi proverbs

मित्रों ! आज हम आपके लिए 125+ हिंदी कहावतें अर्थ सहितhindi proverbs नामक पोस्ट लाये हैं। इसमें 125 से अधिक आम बोलचाल में प्रयोग होने वाली लोकोक्तियों और कहावतों को अर्थ सहित प्रस्तुत किया गया है।

ये कहावतें (kahawat) प्रतियोगी परीक्षाओं एवं कक्षा 6 से 12 तक की विभिन्न परीक्षाओं में प्रायः पूछी जाती हैं। साथ ही यदि आप हिंदी भाषा सीख रहे हैं। तो भी ये आपके लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होंगी।

कहावत kahawat की परिभाषा

कहावत का शाब्दिक अर्थ होता है- “कही हुई बात”। लेकिन हर कही हुई बात कहावत नहीं होती। कहावत की परिभाषा है- जिस पद समूह में अनुभव की कोई बात सुंदर, प्रभावशाली और चमत्कारिक ढंग से कही जाती है, उसे कहावत कहते हैं। कहावत को अंग्रेजी में proverb और उर्दू में ‘मसल‘ कहा जाता है।

हिंदी कहावतें अर्थ सहित
हिंदी कहावतें अर्थ सहित

लोकोक्ति की परिभाषा

लोकोक्ति कहावत का ही एक रूप होती है। लोक का अर्थ है जनसामान्य और उक्ति का अर्थ है कथन। जनसामान्य में प्रचलित कहावतों को लोकोक्ति कहा जाता है। ये प्रायः जनसामान्य की भाषा में होती हैं।

1 से 10 # लोकोक्तियाँ और कहावतें

1- घाट- घाट का पानी पीना– अनुभवी और होशियार होना।

2- अंधा क्या चाहे दो आंखें– मनवांछित वस्तु का प्राप्त होना।

3- अंधा बांटे रेवड़ी, फिर फिर अपने देय– सम्पूर्ण लाभ खुद उठाना।

4- नाच न आवै आंगन टेढ़ा– अपनी कमी का दूसरे को दोष देना।

5- अधजल गगरी छलकत जाय– ज्ञान कम प्रदर्शन अधिक।

6- अपना रख, पराया चख– अपना बचाकर दूसरे का उपयोग करना।

7- अंधे के आगे रोना, अपना दीदा खोना– संवेदनहीन को दुख सुनाना।

8- अपनी करनी, पार उतरनी– अपनी मेहनत से ही काम होना।

9- अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत– समय निकल जाने पर पछताना व्यर्थ है।

10- अरहर की टट्टी, गुजराती ताला– छोटी वस्तु की सुरक्षा पर अधिक व्यय

11 से 20 # hindi proverbs

11- अपनी अपनी ढपली, अपना अपना राग– सबका मत अलग होना।

12- अंधेर नगरी चौपट राजा, टका सेर भाजी, टका सेर खाजा– मूर्ख और गुणवान से समान व्यवहार।

13- अंत भला तो सब भला– अंत में ठीक तो सब ठीक।

14- अटका बनिया, देय उधार– दबाव पड़ने पर काम करना।

15- जैसा राजा, वैसी प्रजा– जैसा मालिक वैसे ही उसके कर्मचारी।

16- ज्यादा जोगी, मठ उजाड़– ज्यादा नेतृत्व करने वाले होने पर काम बिगड़ जाता है।

17- ज्यों ज्यों भीगे कामरी, त्यों त्यों भारी होय– समय के साथ जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

18- जान है तो जहान है– जीवन ही सब कुछ है।

19- जिन खोजा तीन पाइयां, गहरे पानी पैठ– कठिन परिश्रम से सफलता मिलती है

20- जान मारे बनिया, पहचान मारे चोर– चोर और बनिया जान पहचान वालों को ही नुकसान पहुंचाते हैं।

21 से 30 # हिन्दी कहावतें अर्थ सहित वाक्य

21- तुरंत दान महा कल्यान– लेन देन तुरंत चुकाना।

22- तू भी रानी मैं भी रानी, कौन भरेगा पानी– अहं का टकराव होना।

23- थोथा चना, बाजे घना– असमर्थ व्यक्ति बड़ी बड़ी बातें करता है।

24- तेतो पांव पसारिये, जितनी लम्बी सौर– सामर्थ्य के अनुसार व्यय करना।

25- चित भी मेरी, पट भी मेरी– सब तरह से लाभ ही होना।

26- दिनभर चले अढ़ाई कोस– अधिक समय में थोड़ा काम होना।

27- देसी कुतिया, विलायती बोली– अपने से बड़ों की नकल करना।

28- दूध का दूध पानी का पानी करना– निष्पक्ष एवं सटीक न्याय करना।

29- अभी दिल्ली दूर है– सफलता में अभी देर है।

30- दूर के ढोल सुहावने होते हैं– वास्तविकता से दूर।

31 से 40 # proverbs in hindi

31- दुधारू गाय की लात सहनी पड़ती है– जिससे लाभ हो, उसका अप्रिय व्यवहार भी सहना पड़ता है।

32- दूध का जला छाँछ भी फूंक कर पीता है– एक बार धोखा खाने पर सचेत हो जाना।

33- धोबी का कुत्ता, न घर का न घाट का– जिसका कहीं सम्मान न हो।

34- नौ नकद, न तेरह उधार– नकद का कम लाभ उधार के अधिक लाभ से अच्छा है।

35- न रहे बांस न बजे बांसुरी– जड़ को खत्म करना।

36- नदी नाव संयोग– थोड़े समय का साथ।

37- नक्कारखाने में तूती की आवाज– बड़ों के सामने छोटों की आवाज दब जाना।

38- नौ की लकड़ी, नब्बे खर्च– मूल्य से अधिक रखरखाव पर खर्च।

39- नया नौ दिन, पुराना सौ दिन– नए से पुराना अच्छा।

40- नाई नाई बाल कितने, जजमान आगे आएंगे– परिणाम तुरंत मिलना।

41 से 50 # हिंदी कहावतें अर्थ और वाक्य प्रयोग

41- नानी के आगे, ननिहाल की बातें– जानकर व्यक्ति को बहकाना।

42- नाम बड़े और दर्शन थोड़े– प्रसिद्धि के अनुसार गुण न होना।

43- निर्बल के बल राम– गरीब को भगवान का भरोसा।

44- नेकी और पूंछ पूंछ– उपकार करने में पूछने की जरूरत नहीं।

45- न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी– पूरी न हो सकने वाली शर्त रखना।

46- नीम हकीम खतरे जान– कम जानकार से खतरा होना।

47- न सावन सूखा, न भादो हरा– हमेशा एक जैसा रहना।

48- न ऊधौ का लेना, न माधो का देना– कोई मतलब न रखना।

49- नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली– दिखावे को धर्मात्मा बनना।

50- नंगा नहायेगा क्या, निचोड़ेगा क्या– निर्धन से आशा न रखना।

51 से 60 # hindi kahavate

51- नेकी कर दरिया में डाल– भलाई कर के भूल जाना।

52- पढ़े फ़ारसी बेंचे तेल, यह देखो कुदरत का खेल– योग्यता के अनुसार काम न मिलना।

53- पूत कपूत तो क्या धन संचै, पूत सपूत तो क्या धन संचै– संतान चाहे योग्य हो या अयोग्य, धन संचय की जरूरत नहीं।

54- पीर, बावर्ची, भिश्ती, खर– सब काम करने वाला व्यक्ति।

55- फरेगा तो झरेगा– उन्नति के बाद अवनति जरूर होती है।

56- फिसल पड़े तो हरगंगा– मजबूरी में करना।

57- बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद– महत्व न जानना।

58- बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी– आपत्ति ज्यादा दिन नहीं टलती।

60- बद अच्छा बदनाम बुरा– बुराई की बजाय बुरे व्यक्ति से परहेज।

61 से 70 # हिन्दी कहावतें अर्थ सहित

61- बाप न मारी मेंढकी, बेटा तीरंदाज– सामर्थ्य से बढ़ कर बातें करना, शेखी बघारना।

62- बासी बचे, न कुत्ता खाये– सोच समझकर प्रयोग करना।

63- बिल्ली के भाग से छींका टूटा– संयोग से काम हो जाना।

64- बैठे से बेगार भली– कुछ न कुछ करना ।

65- बिन मांगे मोती मिले, मांगे मिले न भीख– मांगने से न मिलना, अपने आप सब मिल जाना।

66- बहरा सो गहरा– चुप्पा व्यक्ति बहुत होशियार होता है।

67- बीती ताहि बिसारि दे, पुनि आगे की सुधि लेय– भूतकाल की गलती या दुख को भूलकर भविष्य के लिए तैयार होना।

68- बूढ़ा तोता राम राम नहीं पढ़ता– बुढ़ापे में नई चीजें सीखना मुश्किल होता है

69- बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होय– जैसा कर्म करोगे, वैसा फल मिलेगा

70- बूढ़ी घोड़ी, लाल लगाम– उम्र के अनुसार साज श्रृंगार करना।

71 से 80 # proverb meaning in hindi

71- मन चंगा तो कठौती में गंगा– मन की शांति सबसे बड़ा सुख है।

72- मान न मान, मैं तेरा मेहमान– जबरदस्ती गले पड़ना।

73- मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक– सीमित पहुंच होना।

74- मुद्दई सुस्त, गवाह चुस्त– मुखिआ ढीला और सहायक तेजतर्रार।

75- मुंह में राम, बगल में छुरी– दिखावटी सज्जनता।

76- मरता क्या न करता– मजबूरी में सब कुछ करना।

77- माया से माया मिले, कर कर लम्बे हाथ– धन ही धन को खींचता है।

78- मियां की जूती मियां के सिर– खुद से हानि उठाना।

79- मेरी बिल्ली मुझी से म्याऊं– मालिक से ही अकड़ना।

80- मतलबी यार किसके, दम लगाए खिसके– स्वार्थी व्यक्ति काम निकल जाने पर भूल जाते हैं।

81 से 90 # लोक-कहावतें

81- यह मुंह और मसूर की दाल– अपनी औकात से बढ़कर बातें करना।

82- रस्सी जल गई, पर ऐंठन न गयी– सब नष्ट हो जाने पर भी अकड़ कम न होना।

83- राम मिलाई जोड़ी, एक अंधा एक कोढ़ी– एक जैसे लोगों की जोड़ी बनना।

84- राम नाम जपना, पराया माल अपना– ऊपर से भक्त, अंदर से ठग

85- लेना एक, न देना दो– कुछ मतलब न रखना।

86- लातों के भूत बातों से नहीं मानते– दुष्ट व्यक्ति बिना दण्ड के नही मानते।

87- लिखे ईशा, पढ़े मूसा– गन्दी लिखावट।

88- लोहा लोहे को काटता है– बराबरी के लोग ही एक दूसरे से निपट सकते हैं।

89- लाल फीताशाही– सरकारी अड़ंगा।

90- वह गुड़ नहीं जो चींटी खाये– उतना आसान नहीं।

91 से 100 # kahawat

91- सावन के अंधे को चारों ओर हरा ही हरा दिखता है– सुखी को सब जगह सुख ही दिखना।

92- सूप तो सूप चलनी भी बोले– खुद दोषी होकर दूसरों में दोष निकालना।

93- सिर मुंडाते ही ओले पड़े– शुरुआत में ही विघ्न पड़ना।

94- सब धान सत्ताईस सेर– सभी के साथ एक जैसा व्यवहार।

95- सस्ता रोवे बार बार, महंगा रोवे एक बार– सस्ती चीज खराब होती है।

96- साँच को आंच नहीं– सच्चे व्यक्ति को कोई डर नहीं।

97- सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे– काम भी निकल जाए एयर कोइ हानि भी न हो।

98- सीधी उंगली से घी नहीं निकलता– सीधेपन से काम नहीं होता।

99- सुनो सबकी करो अपने मन की– सलाह सबसे लेना लेकिन अपने विवेक से काम करना।

100- सूत न कपास जुलाहों के घर लठ्ठम लठ्ठा– बिना बात की लड़ाई।

101 से 110 # hindi kahawat

101- सहज पके सो मीठा होय– आराम से किया गया काम अच्छा होता है।

102- सीधे का मुंह कुत्ता चाटे– सिधाई का अनुचित लाभ उठाना।

103- सूरदास की काली कमरी, चढ़ै न दूजो रंग– किसी में बदलाव का न होना।

104- सेर को सवा सेर मिलना– एक से दूसरा बढ़ कर होना।

105- सैयां भये कोतवाल, अब डर कहे का– प्रभावशाली या अधिकारी से संबंध का लाभ उठाना।

106- समरथ को नहीं दोष गुसाईं– सामर्थ्यवान के अपराध क्षम्य हैं।

107- सौ सुनार की, तो एक लुहार की– निर्बल की सौ चोटों की तुलना में बलवान की एक ही चोट काफी है।

108- हर्रै लगे न फिटकरी, रंग चोखा– बिना खर्च के बढ़िया काम।

109- हाथ कंगन को आरसी क्या– प्रत्यक्ष वस्तु के लिए प्रमाण की क्या जरूरत।

110- हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और– कहना कुछ और करना कुछ और।

111 से 120 # कहावतें अर्थ सहित

111- होनहार बिरवान के होत चीकने पात– योग्य व्यक्ति के लक्षण शुरू में ही पता लग जाना।

112- हवन करते हाथ जले– भलाई के बदले में बुराई मिलना।

113- हंसा थे सो उड़ि गए कागा भये दिवान– भले लोगों के स्थान पर बुरे लोगों को अधिकार मिलना।

114- हर मर्ज की दवा पास होना– हर समस्या का उपाय होना।

115- अपनी टांग उघारिये, आपहि मरिये लाज– घर की बात बाहर कहने से अपनी ही बदनामी होती है

116- आधी धर पूरी को धावै, आधी रहै न पूरी पावै– ज्यादा के लालच में अपने पास का भी खोना पड़ता है।

117- आप न जाये ससुरे औरन को सिख देय– खुद गलत करना और दूसरों को शिक्षा देना

118- खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे– क्रोध या अपमान में अटपटा काम करना।

119- खोदा पहाड़ निकली चुहिया– अधिक मेहनत से थोड़ा लाभ।

120- खग जाने खग ही की भाषा– समान व्यक्ति ही एक दूसरे की बात या समस्या समझ सकते हैं।

120 से अधिक हिन्दी कहावतें अर्थ सहित

121- खेत खाये गदहा, मार खाये जुलहा– करे कोई और, भुगते कोई और।

122- गंगा गए गंगादास, जमुना गए जमुनादास– अवसरवादी व्यक्ति।

123- गए रोज छुड़ाने, नमाज गले पड़ी– एक मुसीबत दूर करने के चक्कर में दूसरी आ गयी।

124- गरीब की जोरू, सब की भौजाई– कमजोर का सब लाभ उठाते हैं।

125- घर में नहीं दाने, अम्मा चलीं भुनाने– योग्यता न होने पर भी बड़ी बड़ी डींगें हांकना।

126- उल्टा चोर कोतवाल को डांटे– गलती भी करे और आंख भी दिखाए।

127- एक तो चोरी, ऊपर से सीनाजोरी– गलत भी करे और अकड़े भी।

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