मोरल स्टोरी-अच्छा पैसा

मोरल स्टोरी-अच्छा पैसा | moral story

मोरल स्टोरी-अच्छा पैसा हमें बताती है कि ईमानदारी से कमाया हुआ पैसा ही अच्छे काम में लगता है. धन जिस तरह से कमाया जाता है, उसी प्रकार से वह खर्च भी होता है. यह एक motivational hindi story है. ऐसी कहानियां हमें जीवन जीने का सही तरीका बताती हैं.

मोरल स्टोरी-अच्छा पैसा

मोरल स्टोरी-अच्छा पैसा
हिंदी कहानियां- अच्छा पैसा

अबुल अब्बास एक त्यागी और ईश्वर भक्त संत थे. उन्होंने अपना जीवन अल्लाह की इबादत में समर्पित कर दिया था. वे किसी से भीख नहीं मांगते थे. अपने भोजन और खर्च का इंतजाम वे स्वयं अपनी मेहनत से करते थे. वे गुजारे के लिए टोपी सीने का काम करते थे.

एक टोपी की कीमत वे केवल दो पैसा ही लेते थे. उन दो पैसों को भी वे पूरा अपने ऊपर नहीं खर्च करते थे. दो पैसों में से एक पैसा जो याचक उन्हें सबसे पहले मिलता, उसे दे देते थे. बाकी बचे एक पैसे से अपना गुजारा करते थे. इस प्रकार जब तक दोनों पैसे खर्च नहीं हो जाते, तब तक नई टोपी नहीं सिलते थे. केवल भजन ही करते रहते. यही उनका नियम था.

उनके अनेक शिष्य थे. शहर का एक धनी व्यक्ति भी उनका शिष्य था. उसने धर्म के नाम पर दान के लिए कुछ रकम निकाल कर रखी थी. वह उसे दान करना चाहता था. लेकिन उसकी समझ में नहीं आता था कि वह दान किसे करे ? इसी समस्या के निराकरण हेतु एक दिन वह संत जी के पास पहुंचा.

उसने संतजी को अपनी समस्या बताई तो उन्होंने कहा, “जिसे सुपात्र समझो, उसे दान कर दो.” शिष्य वहाँ से चला तो रास्ते में उसे सड़क किनारे भीख मांगता एक अँधा दिखा. उसने सोचा की इससे अधिक सुपात्र व्यक्ति कहाँ मिलेगा. इसलिए उसने उस अंधे को एक सोने की मुहर दान कर दी.

वह अपने इस कर्म से बहुत संतुष्ट था कि उसने एक सुपात्र अंधे भिखारी को दान दिया है और दान भी छोटा नहीं एक पूरी सोने की मुहर दी है. अब अंधे को काफी दिनों तक भीख मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

अगले दिन सुबह वह फिर उसी रास्ते से संत जी से मिलने जा रहा था. उसने देखा वह अंधा भिखारी फिर उसी जगह पर बैठा है. वह चुपचाप अंधे के पास गया तो उसने सुना कि वह एक दूसरे भिखारी से कह रहा था, “कल मुझे एक धनी व्यक्ति ने एक सोने की मुहर दी थी. उससे मैंने खूब शराब पी और शहर के सबसे अच्छे वेश्यालय में भी गया.”

यह सुनकर उस व्यक्ति को बड़ी निराशा हुई. उसने संत जी के पास जाकर सारा हाल बताया. संत ने अपनी कमाई का एक पैसा उसके हाथ में देते हुए कहा, “जा ! जो सबसे पहला व्यक्ति तुझे मिले, उसे यह पैसा दे देना और उसके पीछे जाकर देखना वह यह पैसा कहाँ खर्च करता है ?

शिष्य पैसा लेकर निकला तो रास्ते में उसे ठीक ठाक दिखने वाला एक व्यक्ति मिला. उसने उसे पैसा दे दिया और उसका पीछा करने लगा. वह व्यक्ति एक सुनसान जगह पर गया और अपने कपड़ों में छिपाए हुए एक मरे पक्षी को निकल कर बाहर फेंक दिया.

शिष्य से रहा नहीं गया. उसने सामने आकर पूछा, ” यह मरा पक्षी तुम अपने कपड़ों में क्यों छुपाये थे और अब तुमने इसे बाहर क्यों फेंक दिया?” पहले तो उसे देखकर वह व्यक्ति चौंका. फिर उसने उसे सारी बात बताई. उसने बताया, “आज तीन दिन हो गये मेरे परिवार को भोजन नहीं मिला. भीख माँगना मुझे स्वीकार नहीं.”

वह आगे बोला, “इसलिए आज यह मरा पक्षी मुझे मिला तो इसे अपने परिवार की भूख शांत करने के लिए मैंने उठा कर अपने कपड़ों में छुपा लिया. लेकिन आपने मुझे पैसा देकर मुझे इस नीच कर्म से बचा लिया. अब मेरा परिवार भूखा नहीं रहेगा.”

शिष्य को उसकी बात सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ. उसने संत के पास जाकर सारी बात बताई तो संत बोले, ” तुम्हारा पैसा गलत तरीके से कमाया हुआ था, इसलिए वह गलत व्यक्ति को मिला और गलत तरीके से खर्च हुआ. मेरा पैसा ईमानदारी और मेहनत की कमाई का था इसलिए वह सुपात्र को मिला और सही काम में खर्च हुआ. सदैव अच्छा पैसा ही अच्छे काम में लगता है.

कहानी की सीख | Moral of Story

मोरल स्टोरी-अच्छा पैसा हमें सिखाती है कि धन हमेशा ईमानदारी और सही तरीके से कमाना चाहिए. क्योंकि धन जैसे कमाया जाता है उसी प्रकार खर्च होता है.

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