brahma muhurta- ब्रम्हमुहूर्त के फायदे

हिन्दू धर्म और संस्कृति में brahma muhurta (ब्रम्हमुहूर्त) का बहुत महत्व है। पूरे दिन में इसे सबसे शुभ और लाभदायक माना जाता है। चाहे वह वेद आदि धर्मग्रंथ हों या आयुर्वेदिक चिकित्साशास्त्र हों। सबमें ब्रम्हमुहूर्त के महत्व को प्रमुखता से बताया गया है।

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brahma muhurta- ब्रम्हमुहूर्त के फायदे

अब तो आधुनिक मेडिकल साइंस भी ब्रम्हमुहूर्त के महत्व और लाभों को प्रमाणित करता है। तो आइए जानते हैं कि ब्रम्हमुहूर्त क्या है ? इस समय का लाभ कैसे उठाया जा सकता है ?

ब्रम्हमुहूर्त का समय- brahma muhurta timing

ज्योतिष शास्त्र की भारतीय समय गणना के अनुसार समय को घड़ी या घटी में मापा जाता है। एक घड़ी 24 मिनट के बराबर होती है। एक मुहूर्त दो घड़ी के बराबर होता है। इस प्रकार एक मुहूर्त में 48 मिनट होते हैं।

एक दिन को आठ प्रहर में बांटा गया है। एक प्रहर का समय तीन घण्टे के बराबर होता है। इस प्रकार रात्रि के अंतिम प्रहर के अंतिम 48 मिनट के समय (मुहूर्त) को ब्रम्हमुहूर्त कहा जाता है।

इसके बाद के 48 मिनट का समय (मुहूर्त) जब उजाला हो रहा हो, किन्तु सूर्योदय न हुआ हो, को उषाकाल या विष्णुमुहूर्त कहा जाता है।

इस प्रकार ब्रम्हमुहूर्त का समय सुबह 04:24 से 5:12 तक होता है।

brahma muhurta
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ब्रम्हमुहूर्त के फायदे – brahma muhurta benefits in hindi

पूरे दिन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण समय ब्रम्हमुहूर्त को बताया गया है। यह समय गृहस्थ, विद्यार्थी, सन्यासी आदि सभी के लिए अत्यंत उपयोगी है।

धर्मशास्त्रों के अनुसार ब्रम्हमुहूर्त के फायदे

हमारे धर्मग्रंथों में इस समय को अमृततुल्य माना गया है। इसे साधनाकाल, अध्ययनकाल, चिंतन का समय भी कहा जाता है। प्रातः कालीन इस बेला में पूरी प्रकृति शांत अवस्था में रहती है। जिस कारण इस समय की गयी पूजा या प्रार्थना सीधे ईश्वर तक पहुंचती हैं।

इस समय को ब्रम्ह अर्थात ईश्वर का समय भी कहते हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि यह देवी देवताओं के विचरण का समय है। सभी प्रकार की सात्विक साधनाओं का भी यही समय है।

विद्यार्थियों के लिए यह अध्ययन का सर्वोत्तम समय है। रात्रि की निद्रा के बाद मस्तिष्क पूरी तरह तरोताजा रहता है। इसलिए इस समय पढ़ी गयी विषयवस्तु लंबे समय तक याद रहती है। हमारे पूर्वजों को इस समय के महत्व का पूर्ण ज्ञान था। तभी उन्होंने लिखा-

रात को जल्दी सोए, सुबह को जल्दी जागे।
 उस बच्चे से दूर-दूर दुनिया के सब दुख भागे।।

आयुर्वेद के अनुसार के फायदे

आयुर्वेद के अनुसार brahma muhurta के समय वातावरण में प्राणवायु का संचार सर्वाधिक होता है। जो अनेक प्रकार के रोगों के लिए संजीवनी का कार्य करती है। अनिद्रा, चिंता, तनाव आदि अनेक मानसिक एवं शारीरिक बीमारियों का इलाज मात्र इस समय खुली हवा में टहलने एवं योग की क्रियाओं के द्वारा किया जा सकता है।

मेडिकल साइंस के अनुसार ब्रम्हमुहूर्त के फायदे

मेडिकल साइंस के अनुसार इस समय प्रदूषण सबसे कम होता है। साथ ही वातावरण में आक्सीजन की मात्रा इस समय सर्वाधिक लगभग 41 परसेंट होती है। अतः इस समय खुली हवा में टहलने और एक्सरसाइज करने से उच्च रक्तचाप, मधुमेह, एंजाइटी आदि रोग दूर होते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर क्या करना चाहिए ?

ब्रम्हमुहूर्त में क्या करना चाहिए इस विषय में मनुस्मृति का कथन है-

ब्राह्मे मुहूर्ते बुद्ध्येत, धर्मार्थौ चानुचिन्तयेत।

अर्थात ब्रम्हमुहूर्त मे उठकर धर्म और अर्थ यानि धन के संबंध में चिंतन करना चाहिए।

इसके अतिरिक्त सामवेद में कथन है कि-

यद्य सूर उदितोऽनागा मित्रोऽर्यमा। सुवाति सविता भग:॥

सुबह सूर्योदय से पूर्व जो लोग अपनी दिनचर्या शुरू करते हैं और ईश्वरकी पूजा करते हैं, उन्‍हें सुख, समृद्धि के साथ ही धन की भी प्राप्ति होती है।

brahma muhurta में निम्न कार्य करने चाहिए-

1- इस समय जागकर सबसे पहले ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि हमारा आज का दिन अच्छा बीते। इसके बाद सकारात्मक विचारों के साथ दिन का प्रारंभ करना चाहिए। क्योंकि यह एक सामान्य नियम है कि यदि शुरुआत अच्छी होती है तो अंत भी अच्छा होता है।

2- इस समय वातावरण स्वच्छ रहता है और वायु में ऑक्सीजन की मात्रा सर्वाधिक होती है। इसलिए इस समय खुली हवा में टहलना, योग, ध्यान और एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए।

3- विद्यार्थियों को इस समय अध्ययन करना चाहिए। क्योंकि वातावरण की नीरवता एवं सकारात्मक ऊर्जा प्रवाह के कारण इस समय मन एकाग्र होता है। जिससे पढ़ा गया आसानी से समझ में आता है और याद भी रहता है।

4- नियमित पूजा पाठ करने वाले लोगों को चाहिए कि वे प्रयास करें कि अपनी पूजा ब्रम्हमुहूर्त में करें। क्योंकि इस समय की पूजा से देवता शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

5- इस समय घर में धार्मिक गीत, भजन, नामजप आदि बजाने चाहिए। जिससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता आती है।

6- प्रतिदिन ब्रम्हमुहूर्त में उठने मात्र से ही लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं और व्यक्ति को श्री और सफलता की प्राप्ति होती है।

7- उगते सूर्य की किरणें बहुत लाभदायक होती हैं। जो ब्रम्हमुहूर्त में जागने से ही मिल सकती हैं।

8- इस समय उठने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि व्यक्ति के पास पर्याप्त समय होता है। जिससे उसकी दिनचर्या सुव्यवस्थित हो जाती है।

ब्रम्हमुहूर्त (brahma muhurta) में क्या नहीं करना चाहिए ?

1- इस समय सोना सबसे ज्यादा हानिकारक होता है। कहा भी गया है-

ब्राह्मे मुहूर्ते या निद्रा सा पुण्यक्षयकारिणी।

अर्थ- ब्रह्ममुहूर्त की निद्रा पुण्यों का नाश करने वाली होती है।

अथर्ववेद में कहा गया है-

उद्यन्त्सूर्यं इव सुप्तानां द्विषतां वर्च आददे।

अर्थ- जो लोग सूर्य उगने के बाद सुबह उठते हैं उनका तेज खत्‍म हो जाता है और उनके सोचने विचारने की शक्ति भी कम हो जाती है।

2- इस समय यात्रा नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इसे देवयात्रा का समय कहा जाता है।

3- इस समय वातावरण शांत रहता है। एक विशेष प्रकार से क्रमिक रूप से ध्वनि स्तर बढ़ता है। इसलिए इस समय किसी भी प्रकार का शोर उत्पन्न नहीं करना चाहिए।

4- साथ ही इस समय नकारात्मक चिंतन, क्रोध, संभोग, कलह, भोजन, नशा आदि भी नहीं करना चाहिए।

brahma muhurta mantras in hindi- ब्रम्हमुहूर्त की प्रार्थना

brahma muhurta में जागकर सर्वप्रथम दोनों हाथों की हथेलियों को देखते हुए यह श्लोक पढ़ना चाहिए-

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्।।

अर्थ- हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल में ब्रह्मा जी का वास होता है। इसलिए प्रातः काल में सर्वप्रथम दोनों हाथों की हथेलियों का दर्शन करना चाहिए।

उसके बाद उठकर धरती पर पैर रखने से पूर्व पृथ्वी को प्रणाम करना चाहिए। साथ ही उनपर पैर रखने की मजबूरी के लिए निम्न श्लोक पढ़कर क्षमा मांगनी चाहिए–

समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डिते।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे।।

अर्थ- समुद्र रूपी वस्त्रों को धारण करने वाली, पर्वत रूपी स्तनों से सोभित, भगवान विष्णु की पत्नी हे पृथ्वी देवी! आप पैरों से स्पर्श के लिए मुझे क्षमा करें।

तत्पश्चात परमात्मा से प्रार्थना करें–

त्रैलोक्यचैतन्यमयादिदेव ! श्रीनाथ ! विष्णो ! भवदाज्ञयैव।
प्रातः समुत्थाय तव प्रियार्थं संसारयात्रामनुवर्तयिष्ये।।
सुप्तः प्रबोधितो विष्णो ! ह्रषीकेशेन यत् त्वया।
यद्यत् कारयसे कार्यं तत् करोमि त्वदाज्ञया।।

अर्थ- हे परमात्मा ! श्रुति और स्मृति आपकी ही आज्ञाएं हैं। आपकी इन आज्ञाओं के पालन के लिए मैं इस समय से लेकर सोने तक सभी कार्य करूंगा। इससे आप मुझपर प्रसन्न हों।

क्योंकि स्वामी की आज्ञापालन से बढ़कर कोई अन्य सेवा नहीं होती। आपकी आज्ञा यह भी है कि काम करने के साथ ही मैं आपका स्मरण भी करता रहूं। इसलिए यथासंभव आपका स्मरण करता हुआ और नाम लेता हुआ मैं काम करूंगा और उन्हें आपको समर्पित करता रहूंगा। आप मेरी इस कर्मपूजा से प्रसन्न हों।

निष्कर्ष

आजके इस तनावपूर्ण और भागमभाग के जीवन में brahma muhurta का यह समय मानव के लिए वरदानस्वरूप है। इस समय का सदुपयोग करके हम अपने पूरे दिन को ऊर्जावान बना सकते हैं। स्वस्थ और सफल जीवन प्राप्त कर सकते हैं।

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