Akbar Birbal Story- बैल का दूध

अकबर- बीरबल की कहानियों की ऋंखला में आज हम आपके लिए एक रोचक Akbar Birbal Story- बैल का दूध लेकर आए हैं। जो निश्चित ही आपका मनोरंजन करेगी।

Akbar Birbal Story- बैल का दूध

एक बार बादशाह अकबर अपने दरबार में बैठे थे। दरबार सजा हुआ था। सारे दरबारी बैठे थे। तभी उन्हें मज़ाक़ सूझा। उन्होंने कहा, “कल मुझे पेट दर्द हुआ। शाही वैद्य ने दवा बनाने के लिए बैल का दूध माँगा है। उनका कहना है की बैल के दूध से बनी दवा से यह दर्द हमेशा के लिए चला जाएगा। तो आपमें से कौन मेरे लिए बैल का दूध लाएगा।”

Akbar Birbal Story- बैल का दूध
Akbar Birbal Story- बैल का दूध

बादशाह की बात सुनकर सारे दरबारी सन्न रह गये। भला बैल का दूध कौन ला सकता है। बादशाह अकबर बीरबल को बहुत पसंद करते थे। इसलिए दरबार में उनके बहुत विरोधी भी थे। उनको लगा कि बीरबल को नीचा दिखाने का इससे अच्छा मौक़ा नहीं मिलेगा।

उनमें से एक दरबारी खड़ा होकर बोला, “यह थोड़ा कठिन काम है। इसलिए इसे बीरबल से बढ़िया और कोई नहीं कर सकता। बादशाह ने बीरबल से कहा, “क्यों बीरबल ! क्या तुम बैल का दूध ला सकते हो ?” बीरबल तुरंत बोला, “बिलकुल महाराज ! लेकिन इसके लिए मुझे एक सप्ताह का समय चाहिए।”

बादशाह ने एक सप्ताह में बैल का दूध लाने की सहमति दे दी साथ ही कहा कि अगर वह एक सप्ताह में दूध नहीं ला पाया तो उसे जेल में डाल दिया जाएगा। बीरबल ने कह तो दिया लेकिन वह सोच रहा था की बैल का दूध आएगा कहाँ से ? इसी उधेड़बुन में वह घर पहुँचा और चिंतित अवस्था में चुपचाप बैठ गया। बीरबल की लड़की ने पिता को चिंतित देखा तो आकर पूछने लगी कि क्या बात है ?

पहले तो बीरबल ने कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन बार बार पूछने पर उसने सारी बात बता दी। बेटी बोली, “इसमें चिंता की कोई बात नहीं। आप आराम से भोजन करिए। एक सप्ताह के अंदर ही मैं बादशाह को बैल का दूध लाकर दे दूँगी। लड़की का आत्मविश्वास देखकर बीरबल को सांत्वना मिली।

तीन दिन बीतने के बाद एक दिन बीरबल की पुत्री ने घर के सारे पुराने कपड़े इकट्ठे किए और ठीक आधी रात को नदी के तट पर जाकर उनको धोने लगी। वह कपड़ों को ज़ोर ज़ोर से पटककर धो रही थी। रात के सन्नाटे में कपड़ों को पटकने की आवाज बहुत दूर तक जा रही थी। नदी के उस पार बादशाह का महल था।

कपड़े धोने की तेज आवाज से बादशाह की नींद खुल गयी। उन्हें बड़ा गुस्सा आया। उन्होंने सैनिकों को आवाज देकर कपड़े धोने वाले को पकड़कर उनके सामने पेश करने को कहा। सैनिक बीरबल की पुत्री को पकड़कर बादशाह के सामने ले आए। बादशाह ने उससे पूछा, “इस समय कोई कपड़े धोता है। इस समय कपड़े धोकर तुम हमारी नींद में क्यों विघ्न डाल रही हो ?”

लड़की ने हाथ जोड़कर उत्तर दिया, “हुज़ूर, मुझे क्षमा कर दीजिए। मैं मजबूरी में ऐसा कर रही हूँ। आज दिन में मेरे पिता जी को लड़का हुआ। सारा दिन उसी अफ़रा तफ़री में निकल गया। अब समय मिला तो मैं कपड़े धोने आ गयी।”

लड़की की बात सुनकर बादशाह अकबर ग़ुस्से से लाल होकर बोले, “लड़की, मुझसे मसखरी करती हो। इसका अंजाम जानती हो। कहीं किसी पुरुष को भी कभी लड़का होता है।” लड़की ने तपाक से उत्तर दिया, “क्या कहीं बैल के दूध होता है ?”

लड़की की बात सुनकर अकबर को दरबार की घटना याद आ गयी। उन्होंने पूछा, “क्या तुम बीरबल की लड़की हो ?” लड़की ने सहमति में सिर हिलायाऔर बोली, “मुझे क्षमा करें महाराज, अपने पिताजी की रक्षा के लिए मुझे यह नाटक करना पड़ा। लड़की की बुद्धिमत्ता से बादशाह अकबर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा, “बीरबल से जाकर कहना कि उन्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं। कल निश्चिंत होकर दरबार में आएँ।

इस प्रकार बीरबल की पुत्री ने अपनी बुद्धिमत्ता से बादशाह अकबर को संतुष्ट करके अपने पिता को संकट से बचा लिया।

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