असली पुजारी- hindi moral story

moral story की श्रृंखला में आज प्रस्तुत है कहानी असली पुजारी- hindi moral story। यह hindi story हमें मानवीयता की शिक्षा प्रदान करती है।

असली पुजारी- hindi moral story

कुछ वर्षों पहले की बात है। ऋषिकेश के पहाड़ी क्षेत्र में एक विशाल और प्रसिद्ध मंदिर है। वहां के प्रधान पुजारी बहुत योग्य थे। किंतु वृद्धावस्था के कारण वे स्वयं को मंदिर की पूजा में असमर्थ महसूस करने लगे थे।

जिसके कारण उन्होंने एक नए प्रधान पुजारी का चयन करने का निश्चय किया। आस-पास के क्षेत्र में सूचना फैला दी गयी कि मंदिर के नए पुजारी का चयन होना है।

निर्धारित तिथि पर बहुत से प्रतिभागी उपस्थित हुए। वृद्ध पुजारी ने बारी बारी से सबका साक्षात्कार लिया। सबसे पूजा पाठ के विषय में प्रश्न पूछे गए। पूजा विधि और पूजा मंत्र के विषय में गहन और विस्तारपूर्वक चर्चा हुई।

असली पुजारी- hindi moral story
मंदिर

उपस्थित पुजारियों में से कई प्रधान पुजारी के पद के लिए पूर्णतः योग्य थे। वृद्ध पुजारी उनमें से किसी एक का चयन करने ही वाले थे। तभी वहां एक युवक उपस्थित हुआ।

वह पसीने से लथपथ था। कपड़े भी फटे हुए थे। उसने बताया कि वह भी प्रधान पुजारी के पद का प्रतिभागी है। उसकी हालत देखकर सभी प्रतिभागी हंसने लगे। उसका उपहास उड़ाते हुए वे बोले कि यह तो प्रतिभागी नहीं बल्कि भिखारी लग रहा है।

किन्तु वृद्ध पुजारी ने उसे अपने पास बुलाया और देर से आने का कारण पूछा। युवक बोला, “घर से तो मैं प्रातः ही चला था। किंतु मंदिर के रास्ते में जगह जगह कंटीली झाड़ियां थीं। जिनसे मंदिर आने वालों को बड़ा कष्ट हो रहा था।”

“मैं उन कंटीली झाड़ियों को साफ करने लगा। जिसके कारण मुझे देर हो गयी।” उसकी बात सुनने के बाद पुजारी जी ने उससे पूजा विधि और कुछ पूजा मंत्र पूछे। जिनका उसने संतोषजनक उत्तर दे दिया।

तब पुजारी जी ने उस युवक को मंदिर का प्रधान पुजारी घोषित कर दिया। उनके इस निर्णय से बाकी प्रतिभागी असंतुष्ट होकर बोले, “पूजा विधि और पूजा मंत्र तो हमें भी आते हैं। फिर आपने इस फटेहाल युवक को ही प्रधान पुजारी क्यों चुना ?”

वृद्ध पुजारी ने उत्तर दिया, “किसी संस्था के प्रमुख का कार्य केवल सैद्धान्तिक कार्यों में निपुणता ही नहीं है। बल्कि संस्था से संबंधित लोगों की सुविधा और असुविधा का ध्यान रखना भी है।”

मंदिर के प्रधान पुजारी का दायित्व केवल पूजा पाठ ही नहीं है। बल्कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा देखना भी है। इस युवक ने बिना पद प्राप्त किये ही मंदिर के दर्शनार्थियों की चिंता की। इसलिए यह इस पद के लिए पूर्णतः उपयुक्त है।”

Moral- सीख

किसी विषय के सैद्धांतिक और मानवीय दोनों पक्षों में निपुणता प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।

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