मोरल स्टोरी- अन्याय का फल

मोरल स्टोरी- अन्याय का फल

मोरल स्टोरी- अन्याय का फल एक प्रेरणादायक हिंदी कहानी moral story है। ऐसी motivational stories हमें सही आचरण करने को प्रेरित करती हैं। ये story in hindi बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास भी करती है।

मोरल स्टोरी- अन्याय का फल
अन्याय का फल – हिंदी कहानी

एक गांव में धर्मबुद्धि और दुष्टबुद्धि नामक दो मित्र रहते थे। धर्मबुद्धि बहुत ही सदाचारी, सज्जन और सीधा सादा था। जबकि दुष्टबुद्धि अपने नाम को ही तरह दुष्ट, दुराचारी और धूर्त था।

गांव में रोजगार के पर्याप्त साधन उपलब्ध न होने के कारण दोनों मित्रों ने शहर जाकर व्यापार करने का निर्णय लिया। दोनों ने शहर में व्यापार शुरू किया। वहां दो वर्षों तक व्यापार करके उन्होंने एक हजार स्वर्णमुद्राएँ बचाईं। उसके बाद उन्होंने गांव वापस जाने का निर्णय लिया।

गांव आकर उन्होंने एक हजार स्वर्णमुद्राओं को चोरों से बचाने के लिए बरगद के एक पेड़ के नीचे गाड़ दिया। उसके बाद दोनों अपने अपने घर चले गए। घर पहुंचने के बाद दुष्टबुद्धि अपने स्वभाव के अनुसार गलत कार्यों में अपना धन उड़ाने लगा। शीघ्र ही उसका सारा धन समाप्त हो गया।

धन खत्म हो जाने के बाद उसे जमीन में गड़ी एक हजार स्वर्णमुद्राओं का ख्याल आया। एक रात चुपचाप वह उन मुद्राओं को निकाल लाया। थोड़े ही दिनों में उसने वह धन भी उड़ा दिया। फिर एक दिन वह धर्मबुद्धि के पहुंचा और बोला, “मित्र, मुझे खर्च के लिए धन की आवश्यकता है। अतः चलो, उन स्वर्णमुद्राओं को निकाल लाते हैं।”

धर्मबुद्धि ने कहा, “ठीक है।” फिर वे दोनों उसी बरगद के पेड़ के नीचे पहुंचे। काफी खुदाई करने के बाद भी वहां पर स्वर्णमुद्राएँ नहीं मिलीं। मिलती भी कैसे? उन्हें तो दुष्टबुद्धि पहले ही निकाल चुका था।वहां स्वर्णमुद्राएँ न पाकर दुष्टबुद्धि अपने मित्र से झगड़ने लगा। उसने धर्मबुद्धि पर स्वर्णमुद्राएँ अकेले ही निकाल लेन का आरोप लगाया।

दोनों के झगड़ते देख राजा के सैनिक उन्हें पकड़कर राजदरबार ले गए। वहां भी दुष्टबुद्धि ने वही इल्जाम दोहराया। जबकि धर्मबुद्धि इससे इनकार करता रहा। राजा की समझ में भी नहीं आ रहा था कि क्या निर्णय दिया जाय। तब दुष्टबुद्धि ने कहा कि वह पेड़ खुद बोलकर गवाही देगा। तब राजा ने कहा कि ठीक है। कल सुबह पेड़ के पास ही फैसला होगा।

दोनों मित्रों को भी अगले दिन सुबह पेड़ के पास उपस्थित होने का निर्देश देकर छोड़ दिया गया। दुष्टबुद्धि ने घर आकर अपने पिता से अगले दिन सुबह होने से पहले ही पेड़ के कोटर में छिप जाने को कहा। जिससे राजा के पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दिया जा सके और धर्मबुद्धि को फँसाया जा सके। अगले सुबह राजा सहित सभी लोग पेड़ के पास पहुंचे।

राजा ने आवाज देकर पेड़ से पूछा कि स्वर्णमुद्राएँ किसने निकालीं हैं? पेड़ के कोटर में बैठे दुष्टबुद्धि के पिता ने योजनानुसार धर्मबुद्धि का नाम लिया। लेकिन राजा को शक हो गया। उसने पेड़ के तने में आग लगवा दी। आग की तपिश से झुलसकर दुष्टबुद्धि का पिता बाहर निकल आया और तुरंत ही मर गया।

राजा ने दुष्टबुद्धि को कारावास की सजा दे दी और धर्मबुद्धि को राजदरबार में नौकरी दे दी। अन्याय का फल यही होता है.

कहानी से सीख । Moral of Story

मोरल स्टोरी- अन्याय का फल हमें सिखाती है कि हमें किसी के साथ अन्याय नहीं करना चाहिए। किसी दूसरे के हिस्से का कुछ भी अगर उसकी अनुमति के बिना ले लिया जाय। तो निश्चित ही उसका बुरा परिणाम भुगतना पड़ता है।

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